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शंकराचार्च की निसयुक्ति के लिए समय बढ़ाने की मांग खारिज

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शंकराचार्य की नियुक्ति को समय बढ़ाने की मांग खारिज
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ज्योतिष्पीठ विवाद
0 हाईकोर्ट ने कहा, अपील सुप्रीमकोर्ट में लंबित, औचित्यहीन है मांग
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
ज्योतिष्पीठ बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य का नाम तय करने के लिए हाईकोर्ट ने और समय देने की मांग खारिज कर दी है। भारत धर्म महामंडलन ने समय बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। कहा गया कि कोर्ट द्वारा तीन माह में नए शंकराचार्य के चयन की समयसीमा समाप्त हो चुकी है और कोई नाम तय नहीं हो पाया है, इसलिए और समय दिया जाए।
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अर्जी भारत धर्म महामंडल के महासचिव शंभूनाथ उपाध्याय ने दाखिल की थी, जबकि भारत धर्म महामंडल के ही एक अन्य गुट के महासचिव सत्यनारायण पांडेय ने इसका विरोध करते हुए अर्जी दाखिल की थी कि कोर्ट के निर्देशानुसार महामंडल और काशी विद्वत परिषद ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का फिर से ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य के पद पर पट्टाभिषेक कर दिया है। कोर्ट ने अर्जी खारिज करते हुए कहा कि याची न तो इस विवाद के मूल वाद में पक्षकार था और न ही हाईकोर्ट में दाखिल अपील में पक्षकार था। हाईकोर्ट द्वारा 22 सितंबर 2017 को दिए फैसले के खिलाफ अपील सुप्रीमकोर्ट में लंबित है। ऐसे में समय बढ़ानेे की मांग करना अर्थहीन है। अर्जी पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति केजे ठाकर की पीठ ने सुनवाई की। उल्लेखनीय है कि ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य के विवाद में हाईकोर्ट ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद दोनों के दावे को अवैध करार देते रद्द कर दिया था। कोर्ट ने भारत धर्म महामंडल और काशी विद्वत परिषद को तीन माह में नए शंकराचार्य की खोज कर पट्टाभिषेक करने का आदेश दिया था।
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