फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के 25 जवानों ने पूरा किया कोर्स
उड़ान विषय में कैप्टन अभिषेक, जमीनी पाठयक्रम में कैप्टन अमित सिंह को मिली ट्राफी
एयर कमोडोर शंकर श्रीवास्तव रहे समीक्षा अधिकारी, बीएफटीएस की भूमिका के बारे में दी जानकारी
नोट...फोटो है।
प्रयागराज। बम्हरौली स्थित बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (बीएफटीएस) में 25 जवानों के 203 वें आर्मी एविएटर्स कोर्स पूरा करने पर समापन समारोह आयोजित हुआ। यहां बताया गया कि पांच महीने के कठिन परिश्रम में इन 25 जवानों ने अपना कोर्स पूरा किया। कार्यक्रम में कैप्टन अभिषेक सोरण को उड़ान विषयों में प्रथम आने के लिए, कैप्टन अमित सिंह को जमीनी पाठ्यक्रम के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन के लिए ट्राफी देकर सम्मानित एयर कमोडोर एवं एयर अफसर कमांडिंग वायु सेना बम्हरौली शंकर श्रीवास्तव ने किया।
समापन समारोह में बीएफटीएस के प्रशिक्षकों में स्क्वाड्रन लीडर विकास चौधरी को सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक घोषित किया गया। उन्हें ट्राफी भी दी गई। इस मौके पर एयर कमोडोर शंकर श्रीवास्तव ने सेना के अफसरों को बधाई दी। उन्होंने विमानन प्रौद्योगिकी में आए बदलाव पर चर्चा करते हुए पायलटों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कहा कि सैन्य हेलीकॉप्टर वैमानिक के कार्य में त्रुटि के लिए कोई स्थान नहीं होता। समीक्षा अधिकारी के तौर पर उन्होंने कहा कि वे स्वयं को भविष्य में आने वाली युद्ध कला के लिए तैयार एवं निपुण रखे। एयर कमोडोर ने वैमानिकी के तीन महत्वपूर्ण ‘डब्ल्यू’, वजन, वायु तथा मौसम की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसके पूर्व कार्यक्रम में बीएफटीएस के बारे में बताया गया। कहा गया कि एचपीटी-32 विमान पर पायलटों को प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए 16 दिसंबर 1987 में इसे स्थापित किया गया था। पांच जुलाई 1999 से बीएफटीएस की भूमिका भारतीय वायुसेना के फ्लाइट कैडेटों को तैयार करने से भारतीय सेना, नौसेना और तटरक्षक बल के अफसरों को प्रशिक्षित करने के लिए बदल दी गई। हेलीकॉप्टर पर भारतीय सेना के अफसरों को प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण देने के लिए 26 दिसंबर 2005 को इस स्कूल को चेतक हेलीकॉप्टरों से सुसज्जित किया गया।