ओवरहेडेड लाइन घोटाले के जांच अधिकारी पर खिंची तलवार
क्रासर
मुख्य अभियंता ने जांच अधिकारी बनाए गए अधीक्षण अभियंता से किया स्पष्टीकरण तलब
घोटाले के दोषियों पर अब तक कार्रवाई न करने व आरोप पत्र प्रस्तुत न करने की वजह पूछी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। ओवरहेडेड लाइन निर्माण घोटाले की जांच रिपोर्ट पर मुख्य अभियंता एमसी शर्मा ने शुक्रवार को कई सवाल खड़े कर दिए। इस मामले की जांच करने वाले माध्यमिक कार्य खंड के अधीक्षण अभियंता एसके पाठक से स्पष्टीकरण तलब कर लिया गया। साथ ही अब तक इस मामले में कार्रवाई न करने, आरोप पत्र प्रस्तुत न करने के लिए शिथिलता का जिम्मेदार भी ठहराया गया है। मुख्य अभियंता ने एसई से पूछा है कि लाइन निर्माण में व्यापक घोटाला सामने आने के बाद इसके लिए जिम्मेदार पांच अभियंताओं के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। इससे पहले मुख्य अभियंता कार्यालय से इस प्रकरण की जांच करने वाले एसई व एक्सईएन समेत पांच अफसरों के तबादले की संस्तुति की गई थी।
मऊआइमा-सोरांव उपकेंद्र के बीच ओवरहेडेड लाइन निर्माण में हुए घोटाले की दोबारा जांच रिपोर्ट आने के बाद मुख्य अभियंता कार्यालय से शुक्रवार को कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगे जाने से माध्यमिक कार्य खंड में एक बार फिर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कहा जा रहा है कि इस घोटाले पर पर्दा डालने के लिए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। मुख्य अभियंता ने एसई को भेजे पत्र में कहा है कि जांच में 33 केवी मऊआइमा लाइन का जेई महेंद्र कुमार द्वारा फर्जी मापन करने संबंधी तथ्यों, आंकड़ों में विरोधाभास पाया गया है। इसमें एक जगह 18.10 किमी लाइन निर्माण का उल्लेख है, जबकि दूसरे पैरा में 17.10 किमी का। साथ ही इस मामले में घोटाला उजागर होने के बाद इस मामले में उत्तरदायी ठहराए गए जेई, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता लेखाकार समेत पांच अफसरों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई, इसका उल्लेख नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि एसई के स्तर से भी इस मामले में शिथिलता बरती गई है। मुख्य अभियंता ने कहा है कि ठेकेदार समेत इन दोषियों के विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर स्वीकृत परियोजना के पैकेज, वित्तीय लिंकेज व अनुबंध की प्रतिलिपि तीन दिन के भीतर उपलब्ध कराई जाए। अन्यथा माना जाएगा कि एसई के स्तर से इस मामले मेंजानबूझ कर ढिलाई बरती जा रही है। इस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी चेतावनी दी गई है।