फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्म डामर पर दौड़े मैराथन के धावक, पुष्पवर्षा, सीवर, दव्यांग

विज्ञापन
विज्ञापन
गर्म डामर और बिखरी गिट्टियों पर दौड़े मैराथन के धावक
विज्ञापन

टूटी सड़कें, धूल और बाधाओं से जूझ कर तय की 42.195 किमी की दूरी
धरे के धरे रह गए प्रशासन के दावे, अधूरी तैयारियों के बीच पूरी हुई मैराथन
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। 34 वीं अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन पूरी करने के लिए धावकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अधूरी तैयारी के बीच निर्माणाधीन सड़क पर लगाए गए गर्म डामर और जहां-तहां बिखरी गिट्टियों पर ही धावकों को दौड़ना पड़ा। तय रूट पर जगह-जगह गड्ढे और उड़ रही धूल व्यवस्था की कलई खोल रही थी। सड़कों पर वाहन होने के कारण कई लोगों को डिवाइडर से कूदकर रूट बदलना पड़ा। रास्ते में घूम रहे आवारा पशु भी परेशानी का कारण बने। इसके बावजूद हर उम्र वर्ग के लोग शामिल हुए और 42.195 किमी. की दूरी तय की।
इंदिरा मैराथन का आगाज सोमवार को सुबह 6.30 बजे आनंद भवन से हुआ। इस दौरान आनंद भवन से हाईकोर्ट तक धावक अपनी रफ्तार से दौड़ते रहे। सिविल लाइंस हनुमान मंदिर से आगे धावकों की गति में बाधाएं आना शुरू हो गईं। धावक श्यामली सिंह (चेस्ट नंबर- 1531), जितेंद्र सिंह (चेस्ट नंबर-223) आदि को सीएमपी चौराहे के पास ट्रैफिक जाम होने के कारण डिवाइडर से कूदकर रास्ता बदलना पड़ा। बैरहना में निर्माणाधीन सड़क पर गर्म डामर लगाया जा रहा था। पहले से इंतजाम न होने के कारण धावक उसी पर दौड़े, जिससे जूते चिपकने लगे। खुदी सड़कें और गलत रूट डायवर्जन ने प्रशासन के सारे दावों की पोल खोल दी। नए पुल पर एक लेन को खाली रखने का दावा किया गया था जबकि वहां भी जगह-जगह डामर भरे ड्रम, बालू-गिट्टी के ढेर लगे थे। नैनी लैप्रोसी चौराहे पर तो धूल का गुबार उड़ रहा था और चौराहे पर वाहन तेज गति से फर्राटा भर रहे थे। पुलिस कर्मी वहां मौजूद थे लेकिन, ट्रैफिक कंट्रोल करने में वे विफल साबित हुए। धावकों को चौराहों पर सतर्क होकर दौड़ना पड़ रहा था। नैनी एग्रीकल्चर के पास ट्रक खड़े थे। एक दिन पहले वहां की सड़कों के गड्ढे भरे गए थे, जिससे गिट्टियां उखड़ गईं थीं और धावकों के पैर फिसल रहे थे। अरैल चौराहे के पास दर्जनों की संख्या में आवारा पशु टहल रहे थे। टर्निंग प्वाइंट पर बिखरी गिट्टियों के कारण धावक प्रवीण कुमार एवं प्रदुमभन सड़क पर गिर गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जूते में दिक्कत आने की वजह से धावक गौरव पाटिया ने अपना जूता हाथ में लेकर दौड़ना शुरू कर दिया। वहीं पुलिस व प्रशासन की टीम कोरम पूरा करने में व्यस्त थी।
विज्ञापन


बैरहना में खुला था सीवर लाइन का ढक्कन
- गनीमत रही कि मैराथन के दौरान कोई दुर्घटना नहीं हुआ, वरना प्रशासन ने तो इसका इंतजाम पहले से कर रखा था। जिले में मैराथन दौड़ के लिए तय किए गए रास्तों में अव्यवस्था जमकर दिखी। बैरहना चौराहे के पास कई जगह सीवर लाइन के ढक्कन खुले हुए थे और धावकों के साथ चल रहे आफीशीयल्स बार-बारे उन्हें सचेत कर रहे थे। अगर एक कदम भी इधर-उधर पड़ता तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।

ट्राई साइकिल लेकर दौड़े विमलेश
34 वीं इंदिरा मैराथन में दिव्यांग विमलेश कुमार ने अनोखे अंदाज में प्रतिभाग किया। वह ट्राई साइकिल से दौड़े। हालांकि लैप्रोसी चौराहे पर एक कार ने उनकी ट्राई साइकिल में टक्कर मार दी। इस दौरान वहां भीड़ इकट्ठा हो गई। हालांकि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भीड़ को हटाकर विमलेश को वहां से रवाना कर दिया गया।


धावकों पर हुई पुष्पवर्षा, बजीं तालियां
सच्चा बाबा आश्रम अरैल में फूलों से स्वागत, सेवा में जुटे रहे समाजसेवी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इंदिरा मैराथन में शामिल धावकों के उत्साहवर्धन एवं मदद के लिए समाजसेवियों एवं स्थानीय लोगों ने जगह-जगह स्टाल लगा रखा था। जहां पानी, ग्लूकोज, नींबू आदि की व्यवस्था की गई थी। रास्ते में स्कूली बच्चों ने बैंड बाजे के साथ स्वागत किया। फूलों की वर्षा की गई। इस दौरान चौराहों पर तालियां व नारों से स्वागत किया गया।
विज्ञापन

आनंद भवन से शुरू होने वाली इंदिरा मैराथन दौड़ हाईकोर्ट, सिविल लाइंस, नए पुल से होते हुए अरैल नैनी से वापस आकर कंपनी गार्डेन में समाप्त हुई। इस दौरान स्थानीय लोगों ने धावकों का उत्साह वर्धन किया। नए पुल पर स्कूली बच्चों ने बैंड बाजे के साथ देशभक्ति गाना गया। नैनी लैप्रोसी चौराहे के पास सूर्य उदय परिवार की ओर से कैंप लगाया गया। नैनी एग्रीकल्चर की छात्राओं ने धावकों का स्वागत तालियों के साथ किया। सच्चा बाबा आश्रम अरैल के सामने 101 बटुक धावकों ने मंत्रोच्चारण के साथ फूलों की वर्षा की। साथ ही भारत माता की जय, जवान तुम बड़े चलो जैसे नारे लगाए गए। धावकों में जोश भरने और स्वागत करने का दौर पूरे रास्ते चलता रहा। इस दौरान समाजसेवियों ने रास्ते में कैंप लगाकर पानी और फल बांटे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें