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गंगा-यमुना में बढ़ाव

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नरोरा-हरिद्वार के पानी ने बजाई खतरे की घंटी
दोनों बांधों से 1,98,187 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़े जाने से जल दबाव बढ़ा
गंगा-यमुना में फिर उफान, कछार वाले इलाकों में चिंता बढ़ी, बाढ़ चौकियों पर एलर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हरिद्वार, नरोरा से लगातार पानी छोड़े जाने और पहाड़ों पर बारिश होने से मंगलवार को गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। फाफामऊ में गंगा दो सेंटीमीटर प्रति घंटा और नैनी में यमुना एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ने लगी हैं। इससे कछार वाले इलाके में लोगों की धड़कनें तेज हो गईं। मंगलवार को हरिद्वार और नरोरा को मिलाकर 1,98,187 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। ऊपर से निरंतर जल दबाव बढ़ने की वजह से गंगा के निचले स्तरों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से 5.5मीटर और यमुना 6.84 मीटर नीचे बह रही हैं लेकिन, यही हाल रहा तो जल्द ही किनारों की कुछ बस्तियों में पानी प्रवेश कर जाएगा। बाढ़ राहत चौकियों पर तैनात कर्मियों के अलावा पुलिस, पीएससी, एनडीआरएफ को एलर्ट कर दिया गया है।
पहाड़ों पर बारिश और डैम से लगातार पानी छोड़े जाने से गंगा के जल स्तर तेजी से इजाफा होने की आशंका है। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष की जानकारी के अनुसार मंगलवार की शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 78.520 मीटर और छतनाग में 77.130 मीटर रिकार्ड किया गया। नैनी में यमुना का जलस्तर 77.890 मीटर रिकार्ड किया गया। हालांकि चेतावनी बिंदु 83.730 मीटर से गंगा अभी 5.210 मीटर नीचे बह रही हैं लेकिन, बांधों से लगातार पानी छोड़े जाने से दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे कछार वाले क्षेत्रों में किसी भी समय बाढ़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कंट्रोल रूम के अनुसार मंगलवार को नरोरा से 156558 क्यूसेक और हरिद्वार से 41629 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया। इससे पहले छोड़ा गया पानी अब इलाहाबाद में प्रवेश कर गया है।
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बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचे डीएम, आपदा टीमों को 24 घंटे सक्रिय रहने का निर्देश
इलाहाबाद। बाढ़ की आशंका को देखते हुए मंगलवार को रिमझिम बारिश के बीच जिलाधिकारी सुहास एलवाई प्रशासनिक अमले के साथ कछार वाले प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने गंगा घाटों के अलावा बाढ़ में सबसे पहले डूबने वाले इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी सबसे पहले दशाश्वमेध घाट पहुंचे। इसकेबाद नागवासुकी घाट होते हुए छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, चांदपुर, सलोरी, शिवकुटी, शंकरघाट, नारायणी आश्रम, रसूलाबाद, फाफामऊ पुल के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ को देखते हुए आपदा टीमों को 24 घंटे सक्रिय रहने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि बाढ़ से निपटने के लिए जो रणनीति बनाई गई है उसके अनुरूप अफसर तत्परता से काम करें।
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