पीसीएस-प्री परिणाम के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी
दस सवालों को डिलीट करने, दो के जवाब बदलने पर सवाल
अभ्यर्थियों ने कटऑफ अंक के निर्धारण पर भी उठाई आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2017 के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। अभ्यर्थियों ने परिणाम के खिलाफ न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी की है। उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने परिणाम जारी करने की लापरवाही की है और इसकी वजह से मेधावी छात्र चयन से वंचित रह गए हैं।
प्रतियोगियों का कहना है कि आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य अध्ययन के प्रथम एवं द्वितीय प्रश्न पत्र से पांच-पांच सवाल हटाए हैं। इसके बावजूद आयोग ने पहले से निर्धारित पूर्णांक के आधार पर ही एक फार्मूले के तहत कटऑफ अंक जारी किए। प्रतियोगियों ने सवाल उठाए हैं कि सवाल हटाए गए तो उनके अंक हटाकर नए सिरे से पूर्णांक निर्धारित करना चाहिए था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग के फार्मूूले से उन अभ्यर्थियों का नुकसान हुआ है जो चयन की बार्डर लाइन पर थे। इसके अलावा आयोग ने सामान्य अध्ययन के पहले प्रश्नपत्र के दो सवालों के जवाब बदले हैं। आयोग ने अगर दस सवालों को पूरी तरह से डिलीट किया तो इन दोनों सवालों को भी डिलीट करना चाहिए था। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने कुछ अन्य प्रश्नों पर भी आपत्ति की थी और यह आपत्ति सरकारी वेबसाइटों और बड़े लेखकों की पुस्तकों के आधार पर की गई थी। इसके बावजूद आयोग ने इन प्रश्नों को नहीं हटाया और न ही यह स्पष्ट किया कि अभ्यर्थियों की आपत्तियां किस आधार पर खारिज की गईं। इन बिंदुओं के आधार पर अभ्यर्थियों ने अब न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी की है।