इलाहाबाद। गांवों को डिजटली साक्षर बनाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश भर के तकनीकी संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों को गांवों को गोद लेने को कहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (डिजिटल इंडिया) के तहत तकनीकी संस्थान एवं विवि गांव या पंचायत को गोद लेंगे। इस अभियान में उस गांव के ऐसे परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिसका कोई भी सदस्य कंप्यूटर साक्षर नहीं होगा। तेलंगाना राज्य के आदिलाबाद जिले का गांव बसर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) के सहयोग से देश का पहला डिजिटल गांव बन गया है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश भर के विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों को पत्र भेजकर गांवों को डिजिटली साक्षर करने के लिए गोद लेने को कहा है। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति प्रो.एमपी दुबे ने बताया कि मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र के अनुसार विवि जल्द ही सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के साथ एक समझौता करने जा रहा है। सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।
उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति प्रो. एमपी दुबे का कहना है कि विवि पहले ही डिजिटल मुहिम से जुड़कर पूरी प्रवेश प्रक्रिया और स्टडी मैटेरियल को ऑनलाइन कर चुका है। विवि के शोध छात्र भी गांवों को गोद लेकर काम कर रहे हैं। अब इन गांवों को डिजिटली साक्षर किया जाएगा। विवि की ओर से कंप्यूटर साइंस विभाग के निदेशक डॉ. आशुतोष गुप्ता को डिजिटल साक्षरता अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि गांवों की निगरानी की जिम्मेदारी जिलाधिकारी एवं मंडलायुक्त की होगी। प्रदेश स्तर पर इसकी निगरानी प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की होगी।
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अब गांवों को गोद लेंगे विवि-तकनीकी संस्थान
0 मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भेजा दिशा निर्देश
0 प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत कंप्यूटर साक्षर होंगे गांव
अमर उजाला ब्यूरो