अर्द्धकुंभ की तैयारियों से संबंधित बैठक में 1200 रुपये प्रति प्लेट के हिसाब से खाना खिलाना अफसरों को भारी पड़ने जा रहा है। इसकी शिकायत कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने भी जांच बैठा दी है। इस परिप्रेक्ष्य में एडीएम सिटी ने तत्कालीन मेला प्रभारी से फाइल तलब की है।
जनवरी में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में 150 अफसरों ने 1.80 लाख रुपये का खाना खाया था। उसका भुगतान भी हो चुका है। इससे पहले 26 दिसंबर को हुई अखाड़ा परिषद की बैठक में 87 हजार रुपये का नाश्ता हो गया था। इतना ही नहीं, गंगा पूजन में भी मेला प्रशासन ने तीन लाख रुपये से अधिक राशि खर्च कर दी। इसमें 1.60 लाख रुपये की तो संत-महात्माओं को शाल दे दी गई। अन्य सामग्रियाें की भी मनमानी कीमत लगाई गई। अमर उजाला के सोमवार के अंक में इस बाबत प्रमुखता से खबर छपने के बाद डीएम ने जांच बैठा दी है। एडीएम सिटी पुनीत शुक्ला ने बताया कि उस समय मेला प्रभारी रहे आशीष मिश्रा से पूरी जानकारी मांगी है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
खाना और नाश्ता के लंबे चौड़े बिल तथा अन्य सामान का मनमाने कीमत को लेकर अफसरों ने पहले ही आपत्ति जताई थी। हालांकि आपत्ति मौखिक ही रही। एक बड़े अफसर ने तो बिल के भुगतान के लिए हस्ताक्षर भी नहीं किया। हालांकि उन्होंने आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई और पूरा भुगतान हो गया।