आप अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं, लेकिन क्या जानते हैं कि मऊआइमा के रास्तों में उसके इंतजार में एक खौफ भी बैठा है। वो खौफ है लावारिस कुत्तों का। ताजा आंकड़ा डराने वाला है।
सीएचसी मऊआइमा के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल एक जनवरी से सितंबर तक 2998 लोगों को कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगाना पड़ा है यानी औसत हर महीने 333 लोग और हर दिन 11 लोग। सबसे ज्यादा शिकार बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हैं जो सुबह-शाम टहलने या स्कूल जाते हैं।
डॉक्टरों की मानें तो ये महज सरकारी आंकड़ा है। निजी अस्पताल में इलाज कराने वालों की संख्या इससे दोगुनी भी हो सकती है। कस्बे में हालत यह है कि सदर बाजार में सब्जी लेने जाओ तो 10 कुत्ते साथ चलते हैं।
गंजिया बाजार, महतवाना और बैरहना रोड पर शाम सात बजे के बाद अकेले निकलना मुश्किल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनिया में हर साल 59,000 लोग रेबीज से मरते हैं, इसमें 36 प्रतिशत मौत सिर्फ भारत में होती हैं। हमने जब पड़ताल की तो पता चला कि नगर पंचायत ने इस साल एक भी कुत्ते की न तो धरपकड़ की, न टीकाकरण किया। न ही नसबंदी कराई। जिम्मेदारों का जवाब है बजट नहीं है। संवाद
-मैं शुक्रवार को दोपहर खेत से लौट रहा था। अचानक 3-4 कुत्तों ने घेर लिया और पैर में काट लिया। तब से तीन इंजेक्शन लग चुके हैं।-महेश कुमार, ग्रामीण
-बेटा मोहम्मद फजल दुकान से सामान लेने गया था। गली के कुत्ते ने हाथ में काट लिया। अब स्कूल जाने से भी डर रहा है।-फहद आलम, ग्रामीण
-सुबह टहलने निकला तो कुत्ते ने पीछे से हमला कर दिया। अब चलने में भी दिक्कत हो रही है। इंजेक्शन अलग लगवाना पड़ रहा।-सालिक राम, ग्रामीण
-रात में बाइक से आ रहा था। मऊआइमा रेलवे क्रॉसिंग के पास कुत्तों के झुंड ने दौड़ा लिया। बाइक फिसल गई और कुत्ते ने पैर में काट भी लिया।-कैशर अली, ग्रामीण
-मऊआइमा नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों में लावारिस कुत्तों के धरपकड़ के लिए टीम लगाई जा रही है।-मीनाक्षी चतुर्वेदी, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, मऊआइमा
-एक बार रेबीज के लक्षण आ गए तो मरीज 99.9 प्रतिशत नहीं बचता। यह वैक्सीन के इस्तेमाल से 100 फीसद रोकी जा सकती है।-सुरेश कुमार यादव, सीएचसी प्रभारी, मऊआइमा