प्रयागराज। जिले में एम्स या एम्स जैसे मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल का वादा सरकार भूल गई है। शायद यही वजह है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी तमाम दूसरे कार्यों के बीच अस्पताल का कोई जिक्र तक नहीं है। यह बात दीगर है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में ही मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल की आवश्यकता बताई गई है।
जिले में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल खोलने की मुहिम में जुटे इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश को एक लेटर पेटिशन लिखकर मामले पर स्वत: संज्ञान लेने की गुजारिश की है। अजय ने नगर निगम पार्षदों के बीच हस्ताक्षर अभियान चलाकर यह मुद्दा नगर निगम सदन में उठाने का आग्रह किया है ताकि जिले को एक अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल मिल सके।
चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में कहा गया है कि शहर में मौजूदा समय में स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के अलावा जिला स्तर का तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय और मंडल स्तर का काल्विन अस्पताल है। जिला और मंडल स्तरीय अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं की न तो सुविधाएं हैं और न ही डाक्टर। जबकि स्वरूपरानी अस्पताल पर सबसे अधिक भार है। स्वास्थ्य संबंधी सभी जटिल मामले यहीं आते हैं और इस अस्पताल की व्यवस्था जूनियर डाक्टरों केे हवाले है। सीनियर डाक्टर अस्पताल के काम में रुचि नहीं लेते। अस्पताल पुराना होने के कारण यहां आज की जरूरतों और बीमारियों से निपटने योग्य आवश्यक उपकरण और सुविधाएं तथा विशेषज्ञयता नहीं है।
अजय का कहना है कि लोक सभा चुनाव के दौरान ही सरकार ने जिले में एम्स खोलने का वादा किया था मगर चुनाव बाद यह वादा हवा हवाई हो गया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के मुताबिक मौजूदा समय में जिले में 2400 बेड वाले स्पेशलिस्ट हास्पिटल की आवश्यकता है। मध्यम दर्जे के अस्पतालों में भी पांच हजार बिस्तरों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। इसी प्रकार से 500 बिस्तरों वाले मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल के लिए 50 एकड़ भूमि और 350 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।