इलाहाबाद। गोरखपुर जिले में 2007 में हुए दंगे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सरकार मुकदमा चलाने की इजाजत नहीं देगी। दंगों की सीडी में छेड़छाड़ होने से योगी के दंगे में शामिल होने पर संदेह है। इस आधार पर प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का निर्णय लिया है। गोरखपुर दंगे की जांच सीबीआई से कराने और योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा चलाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर मुख्य सचिव ने शुक्रवार को हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी कोर्ट को दी। परवेज परवाज और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति केपी सिंह की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता फरमान नकवी ने मुख्य सचिव के हलफनामे का जवाब देने के लिए तीन सप्ताह की मांग की है, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने याचिका की सुनवाई 27 जुलाई नियत की है। इससे पूर्व महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने कोर्ट को चार मई 2017 को जानकारी दी थी कि गृहसचिव ने योगी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने का इंकार कर दिया है। इस पर कोर्ट ने याची को याचिका संशोधित करने का आदेश दिया था। शुक्रवार को महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि दंगे के साक्ष्य के तौर पर जो सीडी पेश की गई है, उसमें छेड़छाड़ की गई है जिससे योगी आदित्यनाथ की संलिप्तता संदिग्ध है। इस आधार पर अभियोजन स्वीकृति नहीं दी गई। याचिका पर 27 जुलाई को सुनवाई होगी।