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पीसीएस प्री में 10 फीसदी अभ्यर्थी हों सफल, प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की मांग

Mon, 28 Dec 2020 09:38 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की अन्य प्रारंभिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले कुल अभ्यर्थियों में दस फीसदी परीक्षार्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया जाए और केवल उत्तर प्रदेश की महिला अभ्यर्थियों को ही 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाए। ऐसे ही तमाम मुद्दों को लेकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को 11 सूत्री मांगपत्र भेजा है। साथ ही इसकी प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा, मंत्री विधायी व न्याय बृजेश पाठक, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव कार्मिक एवं उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को भेजी है।

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प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले 18 गुना अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किए जाने का प्रावधान है, जिसे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने वर्ष 2019 में घटकर 13 गुना कर दिया। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा गया है कि इससे ग्रामीण पृष्ठभूमि, हिंदी भाषी और विशेषकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा में चयन दुष्कर हो गया है।

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इस विसंगति को हमेशा के लिए समाप्त करने में शासन का हस्तक्षेप जरूरी हो गया है। ऐसे में कुल आवेदकों में कम से कम 10 फीसदी अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित किया जाए। इसके अलावा पिछले दो वर्षों से पूरे देश की महिला अभ्यर्थियों को आयोग की परीक्षाओं में क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। समिति ने मांग की है कि केवल यूपी की महिलाओं को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सरकार अध्यादेश लेकर आए। 
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यूपीपीएससी - फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही मांग की गई है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा में उन सभी विषयों को शामिल किया जाएगा, जिनमें विश्वविद्यालय द्वारा उपाधि प्रदान की जाती है। पूर्व सरकार में हुए भ्रष्टाचार, आयोग द्वारा परीक्षा प्रणाली में लगातार किए जा रहे परिवर्तनों और कोविड संकट को देखते हुए ओवरएज अभ्यर्थियों को पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए कम से कम दो अतिरिक्त अवसर दिए जाएं। पीसीएस-जे परीक्षा में चार अवसरों की बाध्यता समाप्त हो, सीधी भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक जोड़कर अंतिम चयन सूची जारी हो, इंटरव्यू के दौरान आयोग परिसर में जैमर लगे और बेसिक फोन भी निष्क्रिय किए जाएं।

इसके साथ ही अभ्यर्थियों की कॉपियों को स्कैन कर ऑनलाइन देखने की व्यवस्था की जाए, परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा सूची जारी की जाए, सीबीआई जांच को गति प्रदान करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन हो और 10 जुलाई 2013 से अब तक आयोग के खिलाफ हुए आंदोलन में अभ्यर्थियों पर दज मुकदमें वापस लिए जाएं। समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि सरकार 11 सूत्री मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो प्रतियोगी छात्र पूरे प्रदेश में जनजागरूकता अभियान चलाकर छात्रों को बताएंगे कि किस तरह उनके साथ अन्याय हो रहा है और फिर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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