नमामि गंगा योजना के तहत भारत सरकार ने हाईब्रिड-एन्यूटी पर आधारित पीपीपी के जरिये अपशिष्ट जल के लिए बाजार विकसित करने के प्रयास को मंजूरी दे दी है। सीवरेज उपचार के बुनियादी ढांचे के निर्माण के मद्देनजर हाईब्रिड-एन्यूटी आधारित सार्वजनिक एवं निजी भागीदारी मॉडल पर कार्य करने के लिए 10 शहरों को प्रथम चरण में चयनित किया गया, जिनमें इलाहाबाद भी है। नमामि गंगा के तहत इलाहाबाद में सीवर लाइन बिछाने और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए दस अरब रुपये से अधिक लागत वाला प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया गया है।
नमामि गंगे के तहत जिन शहरों का चयन किया गया है, वहां के जिलाधिकारियों के साथ केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू और केंद्रीय मंत्री जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण उमा भारती ने शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये योजना की समीक्षा की। डीएम संजय कुमार ने अब तक हुए कार्यों के बारे में बताया। साथ ही नई योजनाओं के बारे में जानकारी दी। बताया कि 10 अरब 39 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत वाली पांच सीवरेज योजनाओं के डीपीआर स्वीकृति के लिए एनएमसीजी भारत सरकार को भेज दिए गए हैं। इनके तहत 70 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाई जानी है, सात सीवरेज पंपिंग स्टेशन और 69 एमएलडी क्षमता वाले तीन एसटीपी का निर्माण कराया जाना है।
प्रस्तावित लागत में आगामी दस वर्षों तक का संचालन एवं अनुरक्षण व्यय भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद नगर एवं झूंसी क्षेत्र से गंगा में 58 नाले और यमुना में 17 नाले यानी कुल 75 नाले नदियों में गिरते हैं। इनमें से 36 नाले टैप किए जा चुके हैं, 19 नाले निर्माणाधीन योजनाओं के पूर्ण होने पर टैप हो जाएंगे और 20 नाले प्रस्तावित योजनाओं का कार्य पूरा होने पर टैप किए जा सकेंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग में बताया गया कि गंगा के साथ सहयोगी नदियों और जल्द ही यमुना नदी को भी स्वच्छ किया जाएगा। इसके लिए तकरीबन 1500 कंपनियों को एप्रोच किया गया है और विदेशी कंपनियां भी इस कार्य को करने के लिए इच्छुक हैं।