इलाहाबाद जिला पुलिस के लिए अदालती फरमान बेअसर है। फिर चाहे अदालतें समन जारी करें या गैरजमानती वारंट, पुलिस काम अपनी ही रफ्तार से करती है।
बेशक जमानत की मांग करना आरोपी का अधिकार है और बेवजह किसी को लंबे समय तक जेल में रखना उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है पर पुलिस के लिए यह सब बातें मायने नहीं रखतीं।
मुकदमों के प्रति इस हद दर्जे की लापरवाही का नतीजा है कि सैकड़ों लोग बेवजह जेल की हवा काट रहे हैं क्योंकि उनको कोर्ट से जमानत नहीं मिल पाती है।
जबकि हाईकोर्ट का सख्त निर्देश है कि जमानती अपराधों में अभियुक्तों के जमानत प्रार्थनापत्र का एक माह में निस्तारण कर दिया जाए।
पुलिस की इस नाफरमानी पर नाराजगी जताते हुए जिला जज और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महताब अहमद ने एसएसपी को आदेश दिया है कि मुकदमों में पुलिस रिपोर्ट समय से लगाना सुनिश्चित करें।
जिला जज ओपी वर्मा ने मेजा, झूंसी और धूमनगंज थानों से संबंधित जमानत प्रार्थनापत्रों पर पुलिस से आख्या और केस डायरी मांगी गई थी।
प्रार्थनापत्रों पर सोमवार को सुनवाई नियत थी। जिला शासकीय अधिवक्ता (अपराध) रणेंद्र प्रताप सिंह ने न्यायालय को बताया कि संबंधित थानों से आख्या और केस डायरी नहीं भेजी गई है।
इस पर जिला जज ने तीनों थानाध्यक्षों को नोटिस जारी करते हुए 13 और 15 जून तक उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
इंस्पेक्टर कर्नलगंज को ऐसे ही एक मामले में मंगलवार को अदालत में हाजिर होना है। इसी प्रकार से बोर्ड परीक्षा में नकल के मामले में राजकुमार पटेल के जमानत प्रार्थनापत्र पर सराय ममरेज पुलिस द्वारा आख्या नहीं भेजी गई।
पुलिस ने केस डायरी भी कोर्ट को उपलब्ध नहीं कराई। मामले की सुनवाई कर रहे एडीजे महताब अहमद ने एसएसपी और डीएम को निर्देश दिया है कि जमानत प्रार्थनापत्रों में वांछित प्रपत्र तत्परता से उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट ने कहा है कि समय पर प्रपत्र न मिलने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होगी।