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गंगा-यमुना में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगी

Mon, 07 Oct 2013 10:32 PM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगले साल से प्रदेशभर में गंगा-यमुना में मूर्ति विसर्जन की अनुमति नहीं होगी। दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन फिलहाल जिला प्रशासन के गले की फांस बन गया है।
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हाईकोर्ट ने प्रशासन की सभी दलीलों को नकारते हुए गंगा-यमुना में विसर्जन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मूर्तियां डुबाकर वापस निकाल लेने की मांग भी अस्वीकार कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा, साल भर पहले आदेश देने के बावजूद यदि अधिकारी सोते रहे तो अब जनता का गुस्सा भी भुगतें।

गंगा प्रदूषण जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अरुण टंडन की खंडपीठ ने सोमवार को इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पूरे साल अधिकारी एक-दूसरे को चिट्ठियां लिखते रहे।
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मूर्ति विसर्जन का कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं किया गया। खंडपीठ ने कहा कि अगले वर्ष से गंगा-यमुना किनारे के किसी भी जिले में प्रतिमाओं के विसर्जन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि संबंधित जिलों में विसर्जन की वैकल्पिक व्यवस्था साल भर के अंदर कर ली जाए। जिलाधिकारी की ओर से हलफनामा दाखिल करते हुए मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि प्रशासन ने कुछ स्थान चिह्नित किए हैं, मगर वह सभी शहर से बाहर हैं।

विसर्जन के लिए इस बार बाहर के जिलों से मूर्तियां लाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इलाहाबाद में साढ़े तीन सौ के करीब बारवारियां हैं। इनमें से भी शहर में सिर्फ 125 हैं।

मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त करना चाहा कि इस बार सिर्फ मूर्तियां डुबोकर बाहर निकालने की इजाजत दे दी जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि बारवारियों से शपथपत्र ले लिया गया है कि वह कास्मेटिक रंगों और सामग्रियों से बनी प्रतिमाएं नहीं लगाएंगे। इसके लिए क्रेनों का इंतजाम किया जाएगा।

कोर्ट ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए कहा कि प्रशासन को लोगों की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। उसका प्रस्ताव अव्यवहारिक है और इससे विसर्जन पर रोक नहीं लग सकती है।

चिह्नित वैकल्पिक स्थलों को लेकर भी प्रशासन की खिंचाई की गई। किसी भी प्रस्तावित स्थान पर विसर्जन हेतु कोई विकास या सुविधा नहीं दी गई। मात्र कागज पर प्लाट संख्या गिना देने से विसर्जन संभव नहीं है।

साल भर पहले ही लगाई थी रोक

इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने नौ अक्तूबर 2012 को ही गंगा-यमुना में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन पर रोक लगा दी थी। मगर पिछले साल प्रशासन के पास कोई वैकल्पिक प्रबंध नहीं था, इसलिए इस शर्त के साथ विसर्जन की अनुमति दी गई कि मूर्तियों के साथ फूल-माला, कास्मेटिक कपड़े और रंग आदि प्रवाहित नहीं किए जाएंगे। कोर्ट ने विसर्जन से पूर्व और बाद में प्रदूषण का तुलनात्मक अध्ययन करके रिपोर्ट भी मांगी थी। छह नवंबर 2012 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिपोर्ट दी कि विसर्जन के बाद प्रदूषण की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। इसके बाद से हाईकोर्ट ने मूर्ति विसर्जन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाते हुए प्रशासन को वैकल्पिक तौर पर झील या तालाब विकसित करने का निर्देश दिया था।

फाफामऊ में विसर्जन का सुझाव

इलाहाबाद। याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अरुण गुप्ता ने सुझाव दिया कि फाफामऊ पुल के ठीक बगल स्थित बड़े आई लैंड में प्रतिमा विसर्जन किया जा सकता है। इसके बाद विसर्जन करने वालों की भीड़ सहसों होते हुए शास्त्री पुल से लौट आएगी। हालांकि प्रशासन ने जमीन रेलवे की बताते हुए कई अड़चनें गिनाई हैं।
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