राजनीतिक दबाव में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने सरकार को पिछले दो वर्षों के दौरान किए गए तबादलों की जांच करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव से कहा है कि राजनीतिक दबाव में किए गए तबादलों की जांच करें और दोषी पाए गए अधिकारी पर कार्रवाई भी की जाए।
मुख्य सचिव एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2013 के दौरान मंत्रियों या विधायकों के कहने पर अधिकारियों द्वारा किए गए तबादलों की जांच करेंगे।
इसका नतीजा समाचार पत्रों और इंटरनेट के माध्यम ये सार्वजनिक करना होगा ताकि जनता को पता चल सके कि किस विधायक या मंत्री के कहने पर किस अधिकारी-कर्मचारी का तबादला किया गया।
विनोद कुमार जायसवाल और एक अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि कार्यपालिका भी संविधान का अंग है और उसके निष्पक्ष कार्य करने में राजनीतिक हस्तक्षेप गलत है।
कोर्ट ने मुख्य सचिव को जांच करने के बाद मंत्रियों-विधायकों के साथ ही उन अफसरों के नाम भी सार्वजनिक करने को कहा है जिन्होंने राजनीतिक दबाव में तबादले किए। स्थानांतरित किए गए कर्मचारियों का नाम भी उस सूची में होगा।
इसे सर्वाधिक प्रकाशन वाले कम से कम दो समाचार पत्रों में प्रकाशित कराना होगा। अदालत ने कहा कि इंटरनेट पर भी इसे जारी किया जाए ताकि कोई भी व्यक्ति इसे देख सके।
न्यायालय ने याचिका निस्तारित करते हुए याचीगणों का तबादला करने वाले अफसरों पर 50-50 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है।
याची विनोद कुमार का तबादला सीएमओ महोबा से सीएमओ देवरिया के लिए कर दिया गया। वहां उसे ज्वाइनिंग नहीं दी गई क्योंकि वहां लाइब्रेरी सहायक का पद रिक्त नहीं था।
कोर्ट ने पाया कि महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य ने राजनीतिक दबाव के कारण स्थानांतरण बिना इस बात की जांच किए कर दिया कि पद रिक्त है अथवा नहीं।