कस्तूरी स्राव छोड़ते हैं कोबरा
वन विभाग के रेंजर बताते हैं कि जब कोबरा को खतरा महसूस होता है तो वह अपनी पूंछ के पास स्थित ग्रंथियों से कस्तूरी नामक एक दुर्गंधयुक्त तरल पदार्थ छोड़ सकते हैं। इस कस्तूरी की गंध (कस्तूरी जैसी अथवा तीखी) होती है, लेकिन यह इतनी जहरीली नहीं या तेज नहीं होती कि किसी इन्सान को बेहोश कर दे अथवा वह इन्सान चेतना खो दे।
मनोवैज्ञानिक बेहोशी
कोई व्यक्ति कोबरा के आसपास अत्यधिक भय, घबराहट या सदमे के कारण बेहोश हो सकता है, अथवा चक्कर महसूस कर सकता है। लेकिन यह भावनात्मक प्रतिक्रिया है न कि गंध का रासायनिक प्रभाव।
पारिस्थितिकी संतुलन के लिए सांप जरूरी
होश में आने के बाद सूर्यकांत ने बताया कि वह लंबे समय से सांपों को पकड़कर उन्हें बचाने का काम कर रहे हैं। वह सांप को जिंदा पकड़ते हैं और जंगल में छोड़ देते हैं ताकि कोई उन्हें मारे नहीं। कहा कि पृथ्वी के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए सांप बेहद जरूरी हैं।