पिता अपना माल अपने घर व बेटा अपना माल अपने घर ले जाता था। वही माल बेटे के पास से बरामद दिखा दिया है, जबकि लूटा गया माल नहीं मिला। इधर, इस मामले में पुलिस की ओर से जो ९ गवाह बनाए गए, उनमें से परिवार के ५ गवाह में वादी पिता, बुआ, बुआ का बेटा व दो अन्य परिजन थे। वे सभी पक्षद्रोही हो गए और पुलिस की कहानी के साथ खड़े नहीं हुए। हालांकि अभियोजन के गवाह व साक्ष्य भी न्यायालय में रखे गए। मगर गवाहों के पक्षद्रोही होने के आधार पर सोमवार को न्यायालय ने चारों आरोपियों को बरी कर दिया। अधिवक्ता रामबाबू शर्मा का कहना है कि न तो हमारा माल बरामद हुआ और न सही आरोपी पकड़े थे। यह बात हमने साबित की और वही मुकदमा छूटने का आधार बना। इधर, एडीजीसी रामकुमार इसकी पुष्टि करते हुए बताते हैं कि गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण मुकदमा छूटा है।
ऐसे हुई थी हत्या
पुलिस चार्जशीट के अनुसार दोपहर में घर में महिला अकेली थी। तभी बेटा दरवाजे पर आया। महिला किसी अपरिचित के लिए दरवाजा नहीं खोलती थी। बेटे ने दरवाजा खुलवाया और अंदर दोस्त के साथ जाकर पहले मां को बाथरूम में गला घोंटकर मारा। फिर सेफ तोड़कर वहां से माल ले गया। बाद में बुआ का बेटा जब घर आया और घर खुला पाया। तब परिवार को खबर दी। इस दौरान जांच में सीसीटीवी में पुलिस को बाइक पर दो युवक घर से जाते कैद पाए। उनकी मोबाइल कॉल डिटेल ने पहचान योगेश व तरुण के रूप में कराई थी। बाद में उन्होंने माल बरामद कराया था।
ये थे आरोपी
योगेश उर्फ राजा सरोज नगर एटा चुंगी क्वार्सी (आरोपी बेटा)
सोनम उर्फ चित्रा नगला मसानी देहली गेट (बेटे की कथित पत्नी)
तनुज चौधरी देवनगर खैर बाईपास बन्नादेवी(बेटे का दोस्त)
शेहजल चौहान उर्फ रिनी गूलर रोड बन्नादेवी (दोस्त की प्रेमिका)