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सांड़ की तरह सरकार को ‘नाथ’ देंगे : टिकैत

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गोण्डा क्षेत्र के गांव लगसभा के मजरा भ्यामल खेड़ा में आयोजित विशाल किसान पंचायत में भारतीय किसा? - फोटो : CITY OFFICE
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि हमने सरकार की ‘नाथ’ (बैल को काबू करने के लिए उसकी नाक में डाली गई रस्सी) पकड़ ली है। किसान बैल और सांड़ को नाथ कर जिस तरह से ठीक कर देते हैं, तो सरकार को भी ‘नाथ’ देंगे। इस नाथ में ब्रेक, स्टियरिंग, आगे और पीछे करने का सब सिस्टम होता है। सांड़ और बैल की तरह ये सरकार भी बिगड़ा हुआ केस है। इसका साल भर कोर्स है, लेकिन कोई बात नहीं ठीक कर देंगे। टिकैत ने शनिवार को ये बातें गोंडा क्षेत्र के भ्यामल खेड़ा में किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए कहीं।
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उन्होंने कहा कि पीएमओ में व्यापारी घुस गए हैं। उनको वहां से निकालना होगा, क्योंकि सरकार तो चली जाएगी। अगर ये व्यापारी बने रहे तो संकट और बड़ा होगा। इसलिए इन व्यापारियों को वहां से निकालना जरूरी है। पहले ही वालमार्ट जैसी कंपनियां आ चुकी हैं। एक बाजार में दो मार्ट खुलते ही पूरे बाजार का काम खत्म हो जाता है। साप्ताहिक बाजारों में साढ़े चार करोड़ छोटे दुकानदारों का काम प्रभावित हो रहा है। बात जब खेतों पर आई तो आंदोलन शुरू हुआ। धीरे धीरे ये सरकार सब काम छीनने पर आमादा हो चुकी है।
गरमी के मौसम का जिक्र करते हुए टिकैत ने कहा कि अप्रैल में गेहूं काट लो। मई में लू चलेगी, जून में बरसात आ जाएगी। मौसम से डरना नहीं है। मुकाबला करना है। ये लड़ाई अभी और चलेगी। जल्द ही नवंबर दिसंबर का महीना आ जाएगा। दरअसल, उनका इशारा उस तरफ था जो केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों को स्थगित करने का वक्त लिया है। वो कह रहे थे कि लड़ाई थमनी नहीं है।
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टिकैत ने कहा कि कल उनको अलवर में काले झंडे दिखाए गए। बोले.. हम शनिदेव हैं। काले पीले झंडों से कुछ नहीं होगा। जितने मर्जी दिखाओ। लाठी डंडे चलवाओ। जब हमारे लोग चलाएंगे तब पता चलेगा। बोले, शाम को गुजरात जा रहे हैं। गुजरात को आजाद कराना है। इनके नेता कैद में है। सब लोग निगाह रखना। आजकल प्रेस के बीच में से उठा कर ले जाते हैं। पूरा देश बंदी बनाया जा रहा है। ये लुटेरों का आखिरी बादशाह साबित होगा।
राकेश टिकैत ने तीनों कृषि कानून के विरोध में कहा कि गोंडा को स्व. चौधरी चरण सिंह मिनी सिसौली कहते थे। ये आंदोलन की जमीन है। सभी को अपनी औलाद बहुत प्यारी होती है, लेकिन आज भी बुजुर्ग 95 साल होने के बाद भी जमीन बच्चों के नाम नहीं करते, क्योंकि जमीन बिक जाने का डर रहता है। अब हमारी सरकार ही हमारी जमीन छीनने की तैयारी कर चुकी है। तीन कानूनों से किसानों का उत्थान करने की बात की गई, लेकिन पूंजीपति व्यापारियों के गोदाम पहले बन गए। पूंजीपति व्यापारी पीएमओ में घुस गए हैं।
राकेश टिकैत ने कहा कि एमएसपी का लाभ भी इन्हीं व्यापारियों को मिल रहा है। किसानों के माल को काला और गीला बता कर कम कीमत में खरीद कर ये व्यापारी उसको एमएसपी पर बेचते हैं। इसका लाभ उनको मिलता है। सरकार केवल आंकड़ा दिखाती रहती है।
सरकार ने एक ही झटके में बहुत प्लान कर लिया है। छोटे दुकानदारों का काम छीना, साप्ताहिक बाजार का काम कम कराया और अब खेती किसानी को बर्बाद करने पर तुली है। बोले..एक कानून बीज का आ रहा है, बीज के थाने खुलेंगे। किसी दूसरी कंपनी का बीज आपने अपने खेत में डाल दिया तो मुकदमा लिखा जाएगा और सजा होगी। यह कानून इस लिए लाए गए है कि किसान अपने खेतों को छोड़ कर भाग जाएं और पूंजीपतियों का कब्जा हो जाए।
किसानों से लेकर छोटे स्थानीय व्यापारी तक सबको नुकसान हो रहा है। किसान और व्यापारी सब इसको समझ रहे हैं। मथुरा वाले कोसीकलां में खड़े हैं। अनाज लेकर हरियाणा नहीं जाने दिया जा रहा है। अभी हामिदपुर में भी किसानों को गेहूं के साथ रोका जाएगा। मैं कहता हूं कि साथ में लंगर का सामान रखो। लकड़ी वाला चूल्हा रखो। वर्ष 2021 आंदोलन का साल है। जहां भी रोका जाए, वहीं पर बैठ जाओ। वहीं पर धरना शुरू कर दो।
नौ महीने और मांगा सहयोग
टिकैत ने इस आंदोलन की तुलना एक पुरानी कहावत से की, जिसमें कहा जाता है कि बालक खो जाए तो वापस एक साल बाद उसी मेले में मिलता है। उसी तरह से किसान आंदोलन एक साल चलेगा। मौसम से नहीं डरना है। नवंबर, दिसंबर तक ये लड़ाई अपने मुकाम तक पहुंच जाएगी। जिसमें गोंडा के किसानों का पूरा सहयोग मिला है। इस दौरान किसान नेता को बहुत लोगों ने नकदी और हल सहित कई उपहार भेंट किए।
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