कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग में लैब के लिए 34 लाख रुपये दान करने वाले अपने पिता सैयद हुसैन वहीद
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ऑपरेशन थिएटर की रोशनी से लेकर एआई लैब की स्क्रीन तक यह सफर सिर्फ जगह का नहीं, सोच का है। जहां मां ने डॉक्टर बन जिंदगियां बचाने का हुनर सीखा, वहां बेटा अब तकनीक को जिंदगी के और करीब लाने की तैयारी में है। बदलते दौर की यह तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से बाहर आई है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के छात्र रहे सैयद मोहम्मद वहीद ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को 34 लाख रुपये दान में दिए हैं। इस बजट से विश्वविद्यालय परिसर में आगातमी तीन माह में एआई लैब बनाई जाएगी। यहां इंजीनियरिंग के छात्र न सिर्फ भारत की अपनी एल्गोरिदम तैयार करेंगे, बल्कि तकनीक के जरिये आम आदमी के रोजमर्रा से जुड़े कामों को एआई की मदद से आसान करने के मॉडल भी विकसित करेंगे।
सैयद मोहम्मद ने बताया कि उनकी मां डॉ. मसर्रत शिकोह सऊदी अरब के गृह मंत्रालय में प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। उनकी मां ने एएमयू के अधीन जेएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया।
आज भी उनकी मां अलीगढ़ और एएमयू से जुड़े किस्से सुनाती हैं। सैयद मोहम्मद के अनुसार, अलीगढ़ को उन्होंने हमेशा अपनी मां की यादों से समझने का प्रयास किया है। यहां का सामाजिक सौहार्द और शिक्षा के प्रति माहौल से वे काफी प्रेरित भी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई एंबेसडर और एआई एथिक्स विषय के प्रख्यात लेखकों में से एक सैयद मोहम्मद ब्रिटेन सरकार के साथ एआई से जुड़े मॉडल विकसित कर चुके हैं।
बृहस्पतिवार को एएमयू परिसर में जब सैयद मोहम्मद ने 34 लाख रुपये का चेक दिया तो वहां मौजूद हर कोई उनके परिवार से जुड़े किस्से साझा करने लगा। इस दौरान सहकुलपति प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान, कुलसचिव प्रो. आसिम जफर, परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुजीब उल्लाह जुबैरी, प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान, वित्त अधिकारी नूरुस सलाम, सैयद हुसैन वहीद ने उनका आभार जताते हुए भविष्य में एआई पर छात्रों का मार्गदर्शन करने की अपील भी की।