सर्जरी को लेप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी के रूप में जाना जाता है। सर्जरी से न केवल भोजन का सेवन कम हो गया, बल्कि हार्मोंस परिवर्तन से भोजन की लालसा भी कम हो गई। महिला को तीसरे दिन छुट्टी दे दी गई। छह महीने बाद महिला का वजन 29 किलोग्राम कम हो गया।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी के छह महीने बाद एक महिला के वजन में 29 किलोग्राम की रिकार्ड कमी आई है। महिला का वजन पहले 112 किलोग्राम था, जो अब 83 किलोग्राम हो गया है।
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मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने पहली लेप्रोस्कोपिक बेरिएट्रिक सर्जरी से इसको अंजाम दिया। गंभीर रूप से मोटापे से ग्रस्त रोगियों में वजन कम करने के उद्देश्य से की गई इस प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. वासिफ मोहम्मद अली ने किया। उनकी देखरेख प्रो. सैयद अमजद अली रिजवी ने सर्जरी को पूरा किया। 112 किलोग्राम वजन की 32 वर्षीय महिला को जोड़ों के दर्द, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थीं, जिन्हें बेरिएट्रिक सर्जरी से एक नया जीवन मिला।
निजी अस्पतालों में इस सर्जरी पर करीब पांच लाख रुपये का खर्च आ सकता था, लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया में एक लाख रुपये खर्च हुए हैं। इस सर्जरी को लेप्रोस्कोपिक स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी के रूप में जाना जाता है। सर्जरी से न केवल भोजन का सेवन कम हो गया, बल्कि हार्मोंस परिवर्तन से भोजन की लालसा भी कम हो गई। महिला को तीसरे दिन छुट्टी दे दी गई। छह महीने बाद महिला का वजन 29 किलोग्राम कम हो गया। अब उसे मधुमेह या उच्च रक्तचाप की दवा की आवश्यकता नहीं रही।
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इस महिला के साथ ही 120 किग्रा वजन वाले एक अन्य मरीज की भी ऐसी ही सर्जरी हुई। सर्जरी पांच महीने के भीतर उसका वजन 28 किग्रा कम हो चुका है। डॉ. वासिफ ने वजन घटाने की इस सफलता पर जोर दिया। इस सर्जरी में डॉ. मंजूर अहमद, डॉ. इमाद अली और डॉ. इमाद अल्वी, डॉ. कामरान हबीब आदि ने अहम भूमिका निभाई।