एएमयू के विज्ञान संकाय में समकालीन वैज्ञानिक विषयों पर तीन दिवसीय शताब्दी विज्ञान वेबिनार के उद
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नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर तकाकी कजीता ने कहा कि गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने वाली जापान की संस्था केमियोका ग्रेविटेशनल वेब डिटेक्टर ने वैश्विक गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला नेटवर्क के साथ सहयोग प्रारंभ कर दिया है, जिससे पृथ्वी को हिला देने वाली तरंगों को उत्पन्न करने वाली घटनाओं को इंगित करने में मदद मिलेगी।
वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के विज्ञान संकाय के तत्वावधान में समकालीन वैज्ञानिक विषयों पर तीन दिवसीय शताब्दी विज्ञान वेबिनार के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। प्रो. कजीता ने वैश्विक गुरुत्वाकर्षण तरंग नेटवर्क में कई डिटेक्टर स्थापित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कई डिटेक्टर की सहायता से गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के सटीक स्थानीयकरण और प्रलयकारी घटनाओं की अंतर्निहित प्रकृति की बेहतर समझ में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त अध्ययन से विद्युत चुंबकीय और गुरुत्वाकर्षण तरंग उत्सर्जन वाले इंजनों को विस्तार से समझा जा सकेगा।
कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि रसायन विज्ञान, भौतिकी, जैव रसायन और अन्य क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार का बढ़ा महत्व है। एएमयू में अंत:विषयी अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, क्योंकि आवासीय विश्वविद्यालय होने के कारण एएमयू में सभी विभाग और सुविधाएं आसानी से उपलब्ध और सुलभ हैं। उन्होंने शिक्षकों की युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे एएमयू वैज्ञानिकों और शिक्षकों की विरासत को आगे बढ़ाएं और केवल उनकी उपलब्धियों के गुणगान तक ही सीमित न रहें। विज्ञान संकाय के डीन प्रो. काजी मजहर अली ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन प्रो. सज्जाद एम अतहर किया।
2015 में मिला था नोबेल पुरस्कार
जापान के भौतिक विज्ञानी प्रो. तकाकी न्यूट्रिनो प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन्होंने अपनी खोज के लिए 2015 में कनाडा के भौतिक विज्ञानी आर्थर बी मैकडॉनल्ड के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया था।