अकराबाद क्षेत्र में दोपहर से लापता किशोरी की लाश शाम को मिलने के बाद अनुसूचित जाति की आबादी वाला पूरा गांव मौके पर जमा हो गया। कुछ ही देर में वहां कोहराम के साथ-साथ पुलिस से टकराव के हालात पैदा हो गए। जनता पुलिस से भिड़ने और किसी भी कीमत पर शव को गांव से न ले जाने देने पर आमादा थी। इसी बीच आजाद समाज पार्टी के नेताओं की भी यहां एंट्री हो गई। किसी तरह एसएसपी मुनिराज जी ग्रामीणों को समझाने और मनाने में सफल हुए। करीब साढ़े तीन घंटे बाद मुख्य रास्ते के बजाय शव वाली गाड़ी को खेतों के बीच से निकाल कर अलीगढ़ भेजा गया। इसके बाद ही ग्रामीणों की भीड़ वहां से हटी।
शुरुआत में पुलिस कंट्रोल रूम को मिली सूचना पर एसओ रजत शर्मा के अवकाश पर होने के कारण कार्यवाहक एसओ राहुल कुमार मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने शव वहां से पोस्टमार्टम के लिए भेजने की बात कही। मगर, गांव के युवकों ने यह कहकर शव नहीं हटने दिया कि पहले पता तो किया जाए कि क्या हुआ और किसने किया। कार्यवाहक एसओ लोगों को समझा ही रहे थे कि खबर पर एसएसपी मुनिराज जी के साथ एसपी देहात शुभम पटेल, सीओ बरला, एसडीएम कोल, आसपास के कई थानों का फोर्स मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों ने शव उठवाया तो ग्रामीणों ने उनसे शव छीन लिया। बाद में जब शव गाड़ी में रखा जाने लगा तो ग्रामीणों ने रास्ता रोक कर पुआल आदि से आग लगा दी। नाराज लोगों ने पुलिस पर पथराव भी कर दिया। बाद में एसएसपी ने माइक लेकर लोगों को समझाना शुरू किया। तब जाकर वे शांत हुए। इसके बाद शव को मुख्य रास्ते के बजाय खेतों में होकर निकाला गया। इस दौरान वहां आजाद समाज पार्टी के नेता पूर्व विधायक चौ. महेंद्र सिंह आदि भी पहुंच गए थे।
पांच साल की उम्र से नानी के पास रहती थी किशोरी
बुजुर्ग नानी ने एसएसपी को बिलखते हुए बताया कि उसके दो बेटे हैं, जिनमें एक अलीगढ़ में ई रिक्शा चलाता है। दूसरा दिल्ली में अपनी पत्नी के साथ रहकर मजदूरी करता है। करीब एक दशक पहले किशोरी के नाना की मौत के बाद जब वह अकेली रह गई तो उसकी अलीगढ़ निवासी बेटी ने अपनी पांच साल की बेटी को उनके पास इसलिए छोड़ दिया कि धेवती के सहारे मां का मन लगा रहेगा। तब से किशेरी नानी के पास थी।
गांव में 15 दिन पहले छोड़कर आई थी मां
किशोरी के मां-बाप को यह खबर शाम करीब सात बजे मिली तो वे भी गांव पहुंच गए। वहां किशोरी की मां ने रोते हुए बताया कि उसके चार बच्चों में यह तीसरे नंबर की थी। सबसे बड़ी बेटी, उसके बाद बेटा और तीसरे नंबर पर किशोरी और चौथे नंबर पर एक बेटा है। किशोरी के पिता मजदूरी करते थे। मगर कुछ माह से बीमार होने के कारण घर पर ही हैं। मां दिन में एक केंद्र पर नौकरी करती है और रात में अपने देवर के साथ होटल पर रोटी बनाती है। एक माह पहले किशोरी अपनी मां के पास रहने आई थी। 15 दिन रहने के बाद मां उसे नानी के पास छोड़ आई थी। उसे अंदाजा न था कि इस बार वह कभी नहीं लौटेगी।
रोज जाती थी बकरियों के लिए चरी काटने
घटनास्थल पर मीडिया से बातचीत में नानी ने बताया कि घर में उसने बकरियां पाल रखी हैं। उनके लिए खेत में चरी बो रखी है। धेवती हर रोज गांव से 800 मीटर दूरी स्थित खेत पर चरी काटने आती थी। रविवार को रोजाना की तरह वह घर से निकली। मगर ढाई बजे तक न लौटी तो नानी इस गुस्से में घर से उसे खेत पर देखने पहुंची। मगर खेत पर आने के बाद उसने दर्जनों बार उसने अपनी धेवती का नाम लेकर जोर-जोर से आवाज लगाई। मगर, जवाब नहीं आया। इस पर नानी को चिंता हुई तो उसने फिर गांव आकर मोहल्ले के लोगों को बताया। इसके बाद किशोरी की खोज शुरू हुई। तब करीब छह बजे चरी के खेत से करीब 500 मीटर दूरी पर एक गेहूं के खेत में शव मिला।
खींचकर ले जाया गया गेहूं के खेत में
गेहूं के खेत में टूटी फसल इस बात की गवाही दे रही थी कि किशोरी को खींचकर ले जाया गया और वहीं उसके साथ दुष्कर्म का अंदेशा व्यक्त किया गया है। इसके बाद हत्या कर आरोपी जिस तरफ गए हैं, उस तरफ भी फसल टूटी पड़ी है। साथ में किशोरी का शव उल्टा पड़ा था। शव अर्द्धनग्न हालत में था।
घटनाक्रम एक नजर में
- 12:00 बजे दोपहर में घर से चारा लेने गई थी किशोरी
- 02:30 बजे तक न लौटने पर नानी उसे देखने पहुंची
- 06:00 बजे शाम को मिल सका किशोरी का शव
- 06:15 बजे सूचना पर इलाका पुलिस मौके पर आई
- 07:00 बजे एसएसपी व अन्य थानों का फोर्स आया
- 10:30 बजे रात तक वहां से शव को उठाया जा सका