नगर निगम चुनाव में वार्डों में आरक्षण की स्थिति अभी तय नहीं है। शासन की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन नगर निगम के बेहद करीबी और अंदरूनी सूत्रों की मानें तो वार्डों में जो आरक्षण की स्थिति की भनक लगी है? उससे कई दिग्गज पार्षदों के समीकरण बिगड़ने की स्थिति बन रही है। हालांकि कुछ जानकार इसे नियमों के आधार पर किया गया आंकलन भी बता रहे हैं। नगर निगम के चुनाव प्रभारी डॉ. संजीव सिन्हा ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी उनके स्तर से कोई भी आरक्षण आदि की सूचना जारी नहीं की गई है। यह शासन स्तर से ही तय होगा।
जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित वार्डों में वार्ड संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 तक वार्ड शामिल हैं। इसी प्रकार पिछड़ी जाति के लिए वार्ड संख्या 22, 24, 27, 34, 35, 53, 54, 57, 62, 65, 67, 68, 69, 70 वार्ड शामिल हैं। इसमें पांच वार्ड महिलाओं (बीसी) के लिए और शेष पुरुष (बीसी) के लिए आरक्षित होने की बात कही जा रही है।
यह नियमों के आधार पर किया गया आंकलन है
नगर निगम कार्यकारिणी के उप सभापति और वरिष्ठ पार्षद कुलदीप पांडे कहते हैं कि यह आंकलन नियमों के आधार पर किया गया है। जिनमें एक से लेकर 12 तक वार्डोें के अनुसूचित जाति में आने की बात कही जा रही है। यह स्वाभाविक चक्रानुक्रम है। पिछली बार यह जनरल श्रेणी में थे। साथ ही यह नियम है कि जो वार्ड सर्वाधिक अनुसूचित जाति वाले हो गए हैं। वह स्वाभाविक रूप से इस बार एससी श्रेणी में आने हैं। यही मानक बीसी के लिए भी है। जो पिछली बार बीसी श्रेणी में थे। इस बार बीसी श्रेणी में नहीं रहेंगे। वह सामान्य में रहेंगे। सामान्य कोटे से 15 महिलाओं के लिए वार्ड आरक्षित हैं।