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अलीगढ़ : पूरी तकलीफ सुने बिना डॉक्टर लिख रहे दवा

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मलखान सिंह जिला अस्पताल के ओपीडी में दिखाने के लिए उमड़ी मरीजों की भीड़ । अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
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भीषण गर्मी के कारण मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में मरीजों की कतार है लेकिन चिकित्सकों व स्टाफ की कमी का असर साफ दिख रहा है। दो से ढाई घंटे तक लाइन में लगने के बाद जब मरीज का नंबर आता है तो चिकित्सक सिर्फ बीमारी पूछकर दवा लिखकर पर्चा थमा देते हैं। मरीज अपनी पूरी बात तक नहीं बता पाते हैं कि दूसरे मरीज का नाम पुकार दिया जाता है। स्थिति यह है कि एक मरीज को दो-ढाई मिनट का समय भी डॉक्टर नहीं दे पा रहे हैं। अस्पताल में 33 चिकित्सकों के सापेक्ष सिर्फ 17 चिकित्सक हैं।
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अप्रैल में जून जैसी गर्मी से हर कोई परेशान है। चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। सबसे अधिक बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। जिला चिकित्सालय में मात्र एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उनके पास रोजाना 140 से 150 मरीज पहुंच रहे हैं। पांच घंटे की ओपीडी में एक मरीज को ढाई मिनट का भी समय नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा, हड्डी रोग विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक एवं फिजिशियन के कक्ष के सामने भी लंबी लाइन लगी रहती है। कुछ मरीज तो सुबह साढ़े आठ बजे ही पहुंच गए थे।
2021 में ओपीडी में आए 4.20 लाख मरीज, डॉक्टर मात्र 17
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में वर्ष 2021 में ओपीडी में 4.20 लाख से अधिक मरीज पहुंचे थे। 16 हजार से अधिक अस्पताल में भर्ती किए गए थे। इस अवधि में 1900 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन हुआ था। पूरा अस्पताल मात्र 17 डॉक्टरों के भरोसे है। यहां पर डॉक्टरों के 33 पद हैं लेकिन तैनात सिर्फ 17 हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन एवं डेंटिस्ट यहां नहीं है। एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जो पुनर्नियोजन पर तैनात हैं और उनका पुनर्नियोजन अगले महीने समाप्त होने जा रहा है। एक-एक फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट एवं हड्डी रोग विशेषज्ञ से काम चलाया जा रहा है। हड्डी रोग विशेषज्ञ संविदा पर हैं और यहां अटैच है। दो सर्जन एवं दो ईएनटी हैं। डॉक्टरों को ओपीडी के साथ ही सर्जरी, आईपीडी, दिव्यांग बोर्ड एवं जेल आदि में ड्यूटी होती है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। 40 पदों के सापेक्ष सिर्फ 19 स्टाफ नर्स तैनात हैं।
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पिछले सात दिनों में ओपीडी
20 अप्रैल - 1051
19 अप्रैल - 1079
18 अप्रैल - 1458
16 अप्रैल - 970
15 अप्रैल - 704
14 अप्रैल - 521
13 अप्रैल - 1084
पंजे की हड्डी टूट गई है। सुबह साढ़े आठ बजे आया था। अभी 12 बजे रहे हैं। डॉक्टर ऑपरेशन करने गए हैं। डेढ़ बजे के बाद प्लास्टर करने के लिए कहा है। - प्रदीप कुमार, आईटीआई रोड
चार माह के ऋषि के हाथ में छह अंगुलियां हैं और एक में हड्डी नहीं है। तीन दिन से चक्कर लगा रही हूं। सुबह से बैठी हूं, डॉक्टर आएंगे तो ऑपरेशन का समय देंगे। - ऋषि की मां
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बेटा सर्दी, खांसी से परेशान है। तीन दिन पहले डॉक्टर को दिखाया था लेकिन कुछ लाभ नहीं हुआ। एक दवा यहां उपलब्ध नहीं है। दो घंटे के इंतजार के बाद बच्चे को दिखा पाया हूं।
- परवेज, सराय रहमान
गर्मी में बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। प्रतिदिन 140-150 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। कई बार तो इतनी भीड़ व हंगामा होने लगता है कि देखना मुश्किल होता है। - डॉ. बी लाल, बाल रोग विशेषज्ञ
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हड्डी रोग विभाग में मैं अकेला हूं। ओपीडी, आईपीडी, सर्जरी, दिव्यांग बोड व जेल आदि में भी ड्यूटी लगती है। मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ता हूं। सुबह से शाम तक फुर्सत नहीं होती।
- डॉ. प्रवीण गर्ग, हड्डी रोग विशेषज्ञ
चिकित्सालय में चिकित्सकों की भारी कमी है। इससे सेवा प्रभावित होती है। स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट एवं डेंटिस्ट की सख्त जरूरत है। स्टाफ नर्स भी चाहिए। लखनऊ के शीर्ष अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया है और डॉक्टर व स्टाफ नर्स की मांग की गई है।
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- डॉ. ईश्वर देवी बत्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
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