वर्ष 2000 में, उन्होंने वन97 कम्युनिकेशंस की स्थापना की, जो मोबाइल सामग्री और वैल्यू-एडेड सेवाओं पर केंद्रित थी। यह कंपनी पेटीएम की मूल कंपनी बनी। शुरुआत में, कंपनी को कई उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा।
पेटीएम का उदय
2010 में, विजय शेखर शर्मा ने भारत में मोबाइल भुगतान की बढ़ती संभावनाओं को पहचाना और वन97 कम्युनिकेशंस के तहत पेटीएम लॉन्च किया। शुरुआत में, पेटीएम ने मोबाइल रिचार्ज और बिल भुगतान सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया। 2014 में, भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम के साथ साझेदारी ने पेटीएम को एक बड़ा बढ़ावा दिया, जिससे लोग रेलवे टिकटों का भुगतान भी कर सकें। 2016 में भारत सरकार द्वारा की गई नोटबंदी ने पेटीएम के लिए गेम-चेंजर साबित हुई। नकदी की कमी के कारण, लाखों लोगों ने डिजिटल भुगतान को अपनाया, और पेटीएम इस क्रांति का एक प्रमुख लाभार्थी बन गया।
अहम मुकाम
- अलीबाबा का निवेश (2015): चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ग्रुप ने पेटीएम में बड़ा निवेश किया, जिससे कंपनी को और मजबूती मिली।
- नोटबंदी (2016): भारत में हुई नोटबंदी पेटीएम के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। कैशलेस इकोनॉमी की मांग बढ़ने से पेटीएम को भारी फायदा हुआ और यह तेजी से लोकप्रिय हुई।
- पेटीएम पेमेंट्स बैंक (2017): इसी साल पेटीएम पेमेंट्स बैंक की शुरुआत हुई, जिससे कंपनी ने बैंकिंग क्षेत्र में कदम रखा। पेटीएम मनी भी लॉन्च हुआ।
- आईपीओ (2021): नवंबर 2021 में, पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई। यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक था।
- बाजार में हिस्सेदारी: एक समय पेटीएम ने ऑनलाइन भुगतान गेटवे उद्योग में 50 फीसदी से अधिक बाजार हिस्सेदारी का दावा था।