जिले की सियासी विरासत की ऐतिहासिक और सबसे महत्वपूर्ण सीट अतरौली पर बृहस्पतिवार को 18वीं विधानसभा के लिए हुए मतदान के दिन एक नया इतिहास लिखा गया। साठ दशक के इतिहास में विधानसभा चुनाव का पहला मौका रहा कि बिना बाबूजी स्व.कल्याण सिंह बिना परिवार मतदान के लिए मढ़ौली प्राथमिक विद्यालय के मतदान केंद्र पर पहुंचा। इस दौरान उनकी सियासी विरासत संभाल रहे प्रदेश सरकार में मंत्री और इस सीट के भाजपा प्रत्याशी संदीप सिंह ने यही कहा कि बाबूजी के समय से जनता का प्यार हमेशा साथ रहा है। इस बार योगी-मोदी जी योजनाओं से जनता बेहद संतुष्ट है। हम फिर जीतेंगे और प्रदेश में सरकार भी बनाएंगे।
सुबह करीब साढ़े दस बजे अलीगढ़ मैरिस रोड स्थित आवास से पिता व एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, मां पूर्व विधायक प्रेमलता वर्मा, छोटे भाई सौरभ व दो बहनों संग संदीप सिंह यहां मतदान के लिए पहुंचे। उनके आने की खबर पर कुछ मिनट पहले ही उनकी दादी यानि स्व.कल्याण सिंह की पत्नी रामवती देवी को भी अन्य परिजन मतदान केंद्र पर ले आए थे। पूरे परिवार ने यहां एक-एक कर मतदान किया। इसके बाद दादी को वापस मढ़ौली वाले पैतृक आवास ले जाया गया। मां व परिवार के अन्य सदस्य वापस लौट गए, जबकि संदीप व उनके पिता क्षेत्र में चुनावी माहौल को देखने निकल गए।
इस दौरान मीडिया से बातचीत में संदीप ने यही कहा कि ये जनता का ही प्यार है कि 1967 से अब तक दस बार बाबूजी यहां विधायक बने। दो बार उनकी मां व अब वे खुद विधायक हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि जनता बाबूजी के समय वाला प्यार आज भी हमसे करती है। दूसरी बार फिर मौका देगी। हम भी अपने क्षेत्र के लिए समर्पित हैं। पांच साल में भाजपा ने विकास किया है। हां, दो साल कोविड के कारण कुछ परेशानी जरूर आईं। मगर उस दौर में भी गरीब जनता का पूरा ध्यान रखा गया। अतरौली में रोजगार को लेकर कुछ उद्योग लगवाने हैं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि विरोधी दल वोट बैंक की राजनीति करता है। हम विकास की राजनीति करते हैं।
- संदीप सिंह पिछला चुनाव 51 हजार से जीते थे। इस बार दोगुने मतों से जीतेंगे। गठबंधन का पूरे यूपी कोई असर नहीं है। भाजपा की एक तरफा जीत है। भाजपा सरकार ने पिछले संकल्प पत्र में किए सभी वायदे पूरे किए हैं। इस बार भी हर परिवार से एक सदस्य को रोजगार देने का संकल्प भाजपा ने किया है। बिना भेदभाव के पांच साल में जरूरतमंदों तक सरकार की योजनाओं का लाभ मिला है। मोदी योगी की लहर लंबे समय तक चलेगी। यूपी में 300 पार करेंगे। - राजवीर सिंह, एटा सांसद
- पांच साल में सरकार ने काफी काम किए हैं। जनता का पूरा प्यार और आशीर्वाद हर बार की तरह इस बार भी हमारे परिवार को मिलेगा। संदीप सिंह इस बार पहले से भी अधिक वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचेंगे। - प्रेमलता वर्मा, पूर्व विधायक
हमने देखा है बाबूजी का पहला चुनाव
मढ़ौली के मतदान केंद्र से मतदान कर निकले बुजुर्ग हरप्रसाद व नवरत्न बाबूजी कल्याण सिंह के पौत्र को मतदान कर बेहद संतुष्ट थे। उन्होंने बताया कि बाबूजी का पहला चुनाव 1962 में भी हमने देखा था। हालांकि उस समय हमारा मत नहीं था। हम किशोरवय उम्र में थे। प्रचार में लगे थे। उस चुनाव को बाबूजी हारे थे। फिर 67 में जीते थे। उस चुनाव में भी हम जी जान से जुटे थे। हम हमेशा से बाबूजी को वोट देते आ रहे हैं। अब उनके पौत्र को दे रहे हैं। इस परिवार से हमारा गहरा जुड़ाव है। बाबूजी चुनाव में आए या न आए। मगर हमने मत उन्हीं को दिया। वे मतदान के दिन जरूर आते थे। वे बताते हैं कि उस समय गाड़ियों का इतना शोर नहीं होता था। अब गाड़ियों की भीड़ चुनाव में जरूरी है।
बरौली के छेरत बूथ पर संभाली पूर्व सांसद पत्नी ने कमान
जिले की दूसरी हॉट सीट बरौली से भाजपा के प्रमुख दिग्गज ठा.जयवीर सिंह मैदान में हैं। उनका व उनके परिवार का वोट जयवीर सिंह की ससुराल यानि छेरत में है। उन्होंने सुबह ही अपने मझले बेटे अभिमन्यु सिंह व भतीजे पूर्व जिपं अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू संग मतदान किया और वे क्षेत्र में निकल गए। मगर मतदान केंद्र पर उनकी पत्नी पूर्व सांसद राजकुमारी चौहान पूरे दिन व्यवस्थाएं संभालें रहीं।
बता दें कि जयवीर सिंह की छेरत में ससुराल है। यहीं उनके पूरे परिवार का वोट है। सुबह ही उनकी पूर्व सांसद पत्नी राजकुमारी, अपने दो छोटे बेटों व एक बहू संग पहुंच गईं। मतदान केंद्र से कुछ दूरी पर लगे बिस्तर के सहारे बैठकर व्यवस्थाओं की निगरानी करती रहीं। इस दौरान मायके से लेकर गांव, परिवार आदि के एक-एक वोट पर नजर रखी और मतदान के लिए प्रेरित करती रहीं। इस दौरान गांव के युवा उन्हें बुआ कहकर व बड़े बहन के रूप में संबोधित कर उनका आदर सत्कार करते रहे।
दोपहर में सबसे बड़े पुत्र पूर्व में दो बार अलीगढ़ व नोएडा से सांसद का चुनाव लड़ चुके अरविंद सिंह भी अपनी पत्नी संग यहां मतदान के लिए पहुंचे। इस दौरान पूरे समय परिवार के लोग उनके हर दिशा निर्देश पर ध्यान रखे रहे और व्यवस्थाओं को देखते रहे। वहीं राजकुमारी के भतीजे तेजवीर सिंह चौहान व अन्य सभी सदस्य व्यवस्थाओं में लगे रहे।