जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों पर मतदान के बाद रुझान और नतीजों पर कयास लगने शुरू हो गए हैं। सभी के अपने-अपने रुझा और अपने-अपने कयास हैं। हर सीट का परिणाम जुदा है। शहर हो या गांव। हर बाजार, गली, नुक्कड़ और दुकान पर बस एक ही चर्चा है कि आखिर कौन जीत रहा है। किसको कितना वोट मिला होगा। उसके कारणों, जातीय समीकरणों पर भी अपने-अपने आकलन लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इंतजार सभी को दस मार्च का है। बहस के अंत में एक ही बात कह दी जाती है कि अब जो भी हो, परिणाम एक महीने बाद सामने आ जाएगा।
- खैर : जातीय वोट विभाजन पर टिकी विजय, मुकाबला त्रिकोणीय
जिले के जाटलैंड की महत्वपूर्ण आरक्षित सीट खैर में 61.89 फीसदी मतदान में तीन प्रमुख दल सीधी टक्कर में दिख रहे हैं, जिनमें मौजूदा काबिज भाजपा, रालोद व बसपा शामिल हैं। यहां विधायक से और किसान मुद्दों से जुड़ी नाराजगी भी मुद्दा रही है। साथ में जातीय गणित भी हावी रहा है। इस सबके बीच जातीय वोट विभाजन पर विजय टिकी हुई है। यहां सर्वाधिक बहुमत वाले जाट व ब्राह्मणों में तीनों दलों ने सेंधमारी का प्रयास किया है। इसके बाद मुस्लिम व जाटव वर्ग में दो दलों का अपना-अपना प्रभाव काम करता दिख रहा है। सही परिणाम मतगणना के दिन ही सामने आएगा।
बरौली:-सबसे अधिक मतदान वाली सीट का विजेता कौन
जिले के सर्वाधिक मतदान वाली सीट का तमगा ठाकुर व ब्राह्मण बहुल बरौली सीट को मिला है। यहां 64.07 प्रतिशत मतदान हुआ है। मतदान के दौरान मुकाबला त्रिकोणीय होता दिखा। मुद्दे गायब थे। जातीय गणित हावी था। एक तरफ बंटवारा दिख रहा था तो एक तरफ इकतरफा वोट पड़ता दिख रहा था। मुस्लिमों ने इकतरफा मतदान किया है। परिणाम जो भी हों, मगर सियासी पंडित यहां के आकलन को लेकर बेहद परेशान हैं। कोई किसी को हरा रहा है, कोई किसी को। हां, यहां निजी बातों और स्थानीय विषयों को लेकर नाराजगी किसे भारी और किसे लाभकारी होगी, यह परिणाम तय करेगा।
अतरौली:-मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर, सपा ने दी सीधी चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री स्व.कल्याण सिंह की परंपरागत सीट अतरौली पर कुल 59.95 फीसदी मतदान हुआ है। परिणाम क्या होंगे, ये तो 10 मार्च को तय होगा। मगर अभी आकलन के अनुसार मौजूदा सरकार में मंत्री कल्याण सिंह पौत्र संदीप सिंह की प्रतिष्ठा सीधे दांव पर लगी हुई है। उन्हें सपा के पूर्व विधायक वीरेश यादव चुनौती दे रहे हैं। मतदान के दिन पूरे क्षेत्र में वोट दो तरफ होता दिखा। न कोई विषय सामने था और न मुद्दा हावी था। एक तरफ संदीप के प्रति समर्थन उमड़ रहा था तो दूसरी ओर वीरेश के प्रति प्यार दिख रहा था। कुल मिलाकर परिणाम आने पर ही तस्वीर साफ होगी।
छर्रा:-जातीय गणित न बिगाड़ दे कहीं भाजपा का गणित
छर्रा सीट पर मुद्दे भी हावी थे और विरोध भी अपना काम कर रहा था। इस सब के बीच विधायक ने किसी तरह प्रयास कर लोगों को समझाया और मनाया था। मगर मतदान के दिए यहां सपा द्वारा तैयार किया गया जातीय गणित भाजपा के गणित को बिगाड़ता दिख रहा था। हालांकि 62.59 फीसदी मतदान के बाद तस्वीर अलग बन रही है। भाजपा को सपा टक्कर दे रही है। बसपा अलग सेंधमारी कर रही है। परिणाम क्या होगा, ये दस मार्च को साफ होगा।
कोल:-ध्रुवीकरण की ओट, तीनों ओर जमकर पड़ा वोट
आधा शहर और देहात के 77 गांवों वाली इस सीट पर भी भाजपा लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने का प्रयास कर रही है। बहुसंख्यक मुस्लिम मतदाता वाली इस सीट पर ऐन वक्त पर मुद्दे गायब होते दिख रहे हैं। मतदान के दिन ध्रुवीकरण की आड़ में एक तरफ जमकर वोट पड़ा तो दो अन्य दावेदारों को भी खूब वोट पड़ा। कुल मिलाकर इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बना हुआ है। सभी अपने अपने दावे कर रहे हैं। तस्वीर बिल्कुल अलग अलग समझ में आ रही है। परिणाम 10 मार्च को ही साफ होगा।
शहर:-सपा-भाजपा में सीधा मुकाबला, परिणाम तय नहीं
मतदान प्रतिशत के मामले में जिले में दूसरा स्थान पाने वाली सीट पर हर बार की तरह इस बार भी ध्रुवीकरण हावी रहा। सभी मुद्दे ऐन वक्त पर गायब दिखे। मतदान भी 63.72 फीसदी हुआ है। अब एक दूसरे में सेंधमारी और भीतरघात कितना हुआ है, यह 10 मार्च को परिणाम के वक्त तय हो जाएगा। मतदान केंद्रों पर दोनों ओर जिस तरह से भीड़ दिखी, उसे देख दोनों दल पूरी तरह अपनी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं।
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इगलास:-भाजपा के लिए कहीं आवारा पशु भारी न पड़ जाएं
जिले के जाटलैंड की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण सीट पर भाजपा को वापसी के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा है। मतदान के दिन भी यह आलम देखा गया है। हालांकि, मतदान 61.18 फीसदी हुआ है। मगर यहां रालोद ने भाजपा को तगड़ी चुनौती दी है। एक ही मुद्दा चला है आवारा पशुओं से फसली नुकसान को नाराजगी। कई गांवों में विकास कार्य को लेकर बहिष्कार की लहर ने आसपास के क्षेत्रों में भी असर डाला। इस सबसे भाजपा परेशान नजर आ रही है।