दो दिन बाद रमजान और शहर में जबरदस्त पेयजल संकट की मौजूदा स्थिति और इस पर नगर निगम अधिकारियों की उदासीनता पर महापौर मो. फुरकान ने गहरी नाराजगी जताई है और नगर निगम की पूरी स्थिति को 23 मई के बाद नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री के सामने रखने की बात कही है। उन्होंने खुद ही नगर निगम अधिकारियों के साथ शहर में तीन नलकूपों की बोरिंग के रुके पड़े काम को फिर से शुरू कराने की पहल भी की है।
महापौर मो. फुरकान ने बताया कि नगर निगम अधिकारी शहर की संकट झेल रही जनता के लिए संवेदनशील नहीं हैं। अब भी समय है नगर निगम अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर ले। जनता की समस्याएं हल कर दे। ऐसा नहीं होने पर 23 मई को आचार संहिता समाप्त होने के बाद वह नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पूरी शहर की स्थिति से उन्हें अवगत कराएंगे। दूसरी महापौर ने शुक्रवार को शाहजमाल तेलीपाड़ा, भुजपुरा, गोंडा मोड़ आदि क्षेत्रों का भ्रमण किया। यहां के पार्षद अनीश मियां, अमीरुद्दीन अब्बासी, हारुन जग्गी के इलाकों में जहां ट्यूबवेल स्वीकृत थे काम शुरू करवाने के लिए सहमति बनवाई। यहां पर कुछ स्थानीय लोग अलग अलग कारणों से विरोध कर रहे थे। काम एक दो दिन में शुरू कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर महाप्रबंधक (जल) जल निगम के अधिशासी अभियंता, जल निगम के सहायक अभियंता एवं नगर निगम के अवर अभियंता आदि उपस्थित थे। इससे पहले चंदनशहीद ऊपर कोट पर नलकूप निर्माण का रास्ता साफ बना।
बच्ची ने पानी समझकर मिट्टी का तेल पीया
पिछले दो महीने से पानी का संकट झेल रहे मोहल्ला नई बस्ती में प्यास से बेहाल एक छोटी बच्ची घर में बोतल में रखे मिट्टी के तेल को ही पानी समझ कर पी गई। बच्ची को उल्लटियां होते देख घरवाले घबरा गए और जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां पर उपचार के बाद बच्ची की हालत खतरे से बाहर है।
पिछले 10-15 दिन से भीषण गर्मी पड़ रही है। इस पर पेयजल संकट ने स्थिति को और भी बिगाड़ दिया है। नई बस्ती में भी नलकूप खराब होने के चलते पेयजल संकट है। दैनिक जरूरतों से लेकर पीने के पानी तक का संकट है। इन सबके बीच नई बस्ती इलाके में रहने वाले बब्बू मजदूरी का काम करते हैं। शुक्रवार को परिवार के अन्य लोग पड़ोस में थे तो उनकी पांच वर्षीय बेटी आशा को प्यास लगी। वह घर में पीने का पानी इधर उधर तलाश कर रही थी। उसकी नजर घर में रखी बोतल पर पड़ी। उसे लगा कि इसमें ही पानी है।
उसने बिना देखे ही पानी की बोतल को मुंह में लगा लिया। मुंह में लगाने के बाद उसकी तबीयत खराब होने लगी। उसे उल्टियां होने लगीं। पूछने पर बच्ची कुछ बताने की स्थिति में नहीं थी। लगातार उल्टियां होते देख परिवार वाले उसे मलखान सिंह जिला अस्पताल ले गए। इस बीच घरवालों के बोतल की जांच करने पर पता चला कि उसमें मिट्टी का तेल था। यही बात डाक्टर को बताई गई। उपचार के बाद अब बच्ची की हालत खतरे से बाहर है। बच्ची के पिता ने बताया कि इलाके में पानी की भारी कमी है। बच्चों को पीने का पानी भी नहीं है। तभी बच्ची को प्यास लगने के कारण उसने पानी समझकर यह मिट्टी का तेल पी लिया।
उल्टियां हो रही थीं। उपचार के बाद अब बच्ची की हालत अब खतरे से बाहर है। घर में खुले में इस मिट्टी का तेल या अन्य कोई तरल नहीं रखें।
-डॉ. प्रदीप कपूर, बाल रोग विशेषज्ञ, मलखान सिंह जिला अस्पताल