कोरोना काल में दीनदयाल अस्पताल (एल-2) में लापरवाही का तमाशा हो रहा है और संवेदनाएं मर गई हैं। पहले तो यहां मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। अगर, भर्ती कर भी ले रहे हैं तो उनको देखने डॉक्टर नहीं पहुंच रहे हैं। कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन करने पर कोई जवाब नहीं मिलता है। इस सब लापरवाही के बीच निरंजनपुरी निवासी 69 वर्षीय बृजेश शर्मा ने दम तोड़ दिया।
29 अप्रैल की रात उनको दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रजिस्टर में सही नाम पता दर्ज किया गया। मगर, वार्ड और बेड तक पहुंचते-पहुंचते उनको हरिओम शर्मा बना दिया। उक्त हरिओम शर्मा की पहले ही मौत हो चुकी थी। बेड पर पहुंचे तो उन्हें हरिओम शर्मा की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुछेक दवाएं दी जाने लगीं। शुक्रवार रात मरीज की मौत हो गई है। शव 14 घंटे तक बेड पर ही पड़ा रहा। देखने के लिए न तो स्टाफ नर्स पहुंचीं और न ही डॉक्टर।
बृजेश शर्मा के परिवार की महिला अनुपमा शर्मा ने बताया कि वह निरंजनपुरी में रहते थे। 69 साल की उम्र थी। 24 अप्रैल को उनका बेटा संक्रमित हुआ था। इसके बाद अन्य परिवार वाले भी संक्रमित हो गए। 29 अप्रैल की रात को बृजेश शर्मा की हालात बिगड़ी।
उनको दीनदयाल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां पर पता और नाम दर्ज कराया। डॉक्टरों को एक फोन नंबर भी दिया गया। डॉक्टरों ने आश्वासन दिया कि मरीज की स्थिति के बारे में फोन पर अवगत करा दिया जाएगा। उनको नौ नंबर वार्ड में भर्ती करने की जानकारी देते हुए घर भेज दिया।
अगले दिन फोन कर हालचाल लेने के लिए अस्पताल में फोन किया तो वहां से बताया गया कि बृजेश शर्मा नाम का कोई मरीज अस्पताल में नहीं है। इससे परिवार सहम गया। अस्पताल पहुंचे। वहां एक-एक कोरोना वार्ड में जाकर मरीज दर मरीज देखा। मोर्चरी में शव भी देखे। कहीं पता न लगा। इसके बाद महिला वार्ड में जाकर देखा तो वह एक बेड पर बृजेश शर्मा लेटे मिले।
डॉक्टरों से पता किया तो उक्त बेड हरिओम शर्मा के नाम पर पंजीकृत था, जिसकी पहले ही मौत हो चुकी थी। डाक्टरों ने स्वीकारा की गलती से यह हुआ है। इतना ही नहीं, उनको हरिओम शर्मा की रिपोर्ट के आधार पर ही दवाएं दी जाती रहीं। अस्पताल स्टाफ ने गलती सुधार का भरोसा दिया। इसके बाद वहां से परिवार वापस आ गया।
शुक्रवार रात को पता किया तो फिर से मरीज के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया गया। शनिवार सुबह वहां परिवार पहुंचा। वार्ड में देखा तो वह एक बेड पर पड़े थे। पड़ोस के बेड पर भर्ती मरीज ने बताया कि उनकी रात में ही मौत हो चुकी है। कोई नर्स या डॉक्टर देखने तक नहीं आया। रात 12 बजे हुई मौत के बाद शनिवार दोपहर 2 बजे शव को परिवार वालों के कहने पर हटाया गया।
एसडीएम ने सीएमएस को सौंपी जांच, कइयों पर गिरेगी गाज
बृ जेश शर्मा की मौत और इलाज में लापरवाही, मरीज का रिकार्ड न रखने के आरोप में एसडीएम कोल रंजीत सिंह ने मामले में जांच बैठा दी है। उन्होंने मृतक बृजेश शर्मा के भतीजे मोहन शर्मा की लिखित शिकायत पर यह जांच बैठाई है। सीएमएस दीनदयाल अस्पताल को जिम्मा दिया गया है कि वह अपने स्तर से इस प्रकरण के लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दें। एसडीएम कोल ने बताया यह गंभीर लापरवाही है। दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पिता अंदर भर्ती, बेटा बाहर से लगा रहा हालत जानने की गुहार
दीनदयाल अस्पताल में भर्ती राजेंद्र निवासी कासिमपुर, जवां के बेटे योगेश ने बताया कि उनके पिता कोविड वार्ड में भर्ती हैं। अस्पताल के कोविड हेल्पलाइन नंबर से लेकर वार्ड के बाहर जाकर कई बार डॉक्टर से गुहार लगाई है कि उनके पिता की हालत कैसी है सिर्फ इसके बारे में जानकारी दे दें, लेकिन कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
गिर रहा ऑक्सीजन स्तर, मरीज को नहीं कर रहे भर्ती
पला साहिबाबाद की अंजलि (45) शनिवार को दीनदयाल अस्पताल में पति के साथ पहुंची। वहां उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरता जा रहा था। परिवार वाले भर्ती करने की गुहार लगा रहे थे। मगर, मरीज को भर्ती नहीं किया गया।
कोरोना से बचा रहे हो या फैला रहे हो : कमिश्नर
दीनदयाल अस्पताल में चरमराई व्यवस्था न सिर्फ मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। बल्कि उनके तीमारदारों को भी मौत के मुंह तक पहुंचाने का काम कर रही है। डाक्टरों, स्टाफ द्वारा इस्तेमाल की जा रहीं पीपीई किट को बाहर खुले में फेंक दिया जा रहा है। रास्ते भर में मास्क और ग्लब्स पड़े रहते हैं। शनिवार दोपहर को मंडलायुक्त गौरव दयाल यहां निरीक्षण को पहुंचे। उनके सामने ही इन अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई। उन्होंने तमाम फटकार वहां के जिम्मेदारों को लगाई।
नहीं शुरू हो सकी एंटीजन जांच, मंडलायुक्त का आदेश भी हवा-हवाई
दीनदयाल अस्पताल में एंटीजन किट से भी जांच करने का आदेश मंडलायुक्त गौरव दयाल ने तीन दिन पहले दिया था। मगर, अभी तक वहां पर एंटीजन जांच की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया है। सिर्फ आरटीपीसीआर जांच ही हो रही हैं। आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट भी तीन से चार दिन में आ रही है।
कारगिल युद्ध में मान बढ़ाने वाले बृजपाल को नहीं मिला एक बेड
शहर के महेंद्र नगर के रहने वाले बृजपाल सिंह सेना से रिटायर्ड सूबेदार हैं। इन्होंने देश के लिए कारगिल युद्ध में अपनी जान की बाजी लगाई। सात साल पहले रिटायर हुए हैं। पिछले तीन दिनों से इनकी तबीयत खराब है। ऑक्सीजन स्तर गिर रहा है। मगर, उनको एक बेड किसी अस्पताल में नसीब नहीं हो रहा है। भतीजे रुपेंद्र ने बताया कि अलीगढ़ में बेड न मिलने के बाद आगरा के सेना अस्पताल में लेकर गए। वहां भी उपचार नहीं मिला। इसके बाद मथुरा के एक निजी अस्पताल में शनिवार को भर्ती कराने के प्रयास जारी रहे।