सर्दियों में बच्चों के स्कूल की शीतकालीन छुट्टियों के दौरान महीनों से घूमने-फिरने का प्लान बना रहे लोगों के अरमानों पर रेलवे ने पानी फेर दिया है। मेल, एक्सप्रेस सहित शताब्दी-राजधानी जैसी गाड़ियों के निर्धारित समय से घंटों की देरी से चलने और अलीगढ़ होकर गुजरने वाली लगभग आधा दर्जन एक्सप्रेस ट्रेनों के रद्द या सप्ताह में संचालन के दिनों में कटौती होने के कारण मजबूरन लोगों को यात्रा रद्द करनी पड़ी।
रेलवे के वर्षों पुराने इस ढर्रे से बच्चों से लेकर बड़ों तक में विभाग के प्रति नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सर्दियां तो सिर्फ बहाना है। असल में इन दिनों में कोहरे का हवाला देकर ट्रेनों को रद्द करने के पीछे विभागीय अधिकारी अपना बजट संभालने की कोशिश करते हैं। इन दिनों में सिर्फ वही ट्रेनें रद्द की जाती है जो अक्सर घाटे में संचालित होती हैं।
इन ट्रेनों को रद्द और समय परिवर्तित किया गया
कोहरा शुरू होने से पहले ही रेलवे ने अमृतसर-गोरखपुर, ऊंचाहार, लिच्छवी, झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस को 13 दिसंबर से लेकर 15 फरवरी तक के लिए रद्द किया है। वहीं, संपूर्ण क्रांति, मधुवनी, स्वतंत्रता सेनानी, जनसाधारण एक्सप्रेस सप्ताह में प्रतिदिन के स्थान पर एक दिन के अंतराल से चलेंगी। इसके साथ ही कैफियात एक्सप्रेस (आजमगढ़ से दिल्ली गुरुवार और दिल्ली से आजमगढ़ जाने वाली बुधवार के दिन नहीं चल रही है। इधर, हिमगिरी, जम्मूतवी मंगलवार और गुरुवार के दिन रद्द की गई है। महाननदा एक्सप्रेस मंगलवार, गुरुवार, शनिवार और रविवार को रद्द की गई है। इसके साथ ही अलीगढ़-बरेली पैसेंजर, महानंदा और महाबोधि भी लंबे समय से रद्द चल रही है। पांच दिन रद्द होने के बाद गुरुवार को महाबोधि अपने निर्धारित समय से जंक्शन पर पहुंची। इनके साथ ही लगभग आठ ट्रेनें दो से पांच घंटे की देरी से जंक्शन पर पहुंची। अलीगढ़ जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक डीके गौतम ने बताया कि विभाग ने कोहरे में ट्रेनों के समय पर संचालन करने के लिए यह कदम उठाया है।
परिवार के साथ इस बार नव वर्ष पर शिरणी जाकर साईं बाबा के दर्शन करने का प्लान था। इसी के साथ मुंबई आदि भी घूमने का प्लान बनाया था। मगर ट्रेनों के रद्द और लेटचलने के कारण परिवार को प्लान कैंसल करना पड़ा। अब गर्मियों की छुट्टियों में परिवार के साथ जाएंगे।
- विनीता वार्ष्णेय, हाथरस अड्डा
रेलवे का ट्रेनों को रद्द करने का हर साल का फंडा है। सरकार कितने भी प्लान बना ले, लेकिन लोगों को उनका फायदा नहीं मिलता। महीनों पहले इस बार परिवार के साथ शीतकालीन छुट्टियां बाहर जाकर मनाने का प्लान था। मगर, मजबूर कैंसल करना पड़ा।
- मनीष, दुबे पड़ाव