क्वार्सी चौराहे पर शाम 6 बजे लगा जाम ।
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शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। यातायात पुलिस व्यवस्था में सुधार नहीं कर पा रही है। आलम यह है कि चौराहों पर लाल व हरी बत्ती लगी होने के बावजूद जाम लग रहा है। आलम यह है कि 20 मिनट का सफर एक घंटे में तय हो पाता है। इसको लेकर लोगों में बेहद नाराजगी भी है। हालांकि, सोमवार से सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियान शुरू किया गया है। लेकिन इसका असर शहर की सड़कों पर नहीं दिखाई दिया।
सड़क सुरक्षा सप्ताह अभियान के तहत लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। लेकिन शहर के चौराहों की स्थिति देखें तो पिछले वर्षों के मुकाबले लाल बत्ती और सीसीटीवी कैमरे से कुछ राहत मिली है। हास्यास्पद यह है कि चौराहों पर लाल बत्ती होने के बावजूद शहर का ट्रैफिक, पुलिस और होमगार्डों पर निर्भर है। विभिन्न चौराहों की बंद पड़ी लाल बत्ती राहगीरों को गफलत में डालती हैं। इससे लोग कभी इस पर रुक जाते हैं तो कभी वाहन को लेकर निकल पड़ते हैं। इसी के चलते चौराहों पर जाम लग जाता है। चौराहों पर हरी बत्ती की समय सीमा एक मिनट के अंदर ही है। ऐसे में लाल बत्ती पर रुके वाहन हरी बत्ती होने पर नहीं निकल पाते हैं। लोग लाल बत्ती को क्रास करते हैं। इससे हादसे की संभावना रहती है। जनपद में 2019 के मुकाबले हादसों में कोई विशेष कमी नहीं आई है। 2020 में कोरोना काल के चलते हादसे कुछ कम हुए थे तो 2021 में फिर से बढ़ गए। जबकि शहर के चौराहों पर यातायात का इतना लोड रहता है कि जाम जैसे हालत बने रहते हैं। संकरी सड़कें और फुटपाथ के अतिक्रमण के चलते यहां भी लोग घंटो तक फंसे रहते हैं।
तीन साल में सड़क हादसों की स्थिति
वर्ष हादसे मृतक घायल बिना हेलमेट
2019 489 391 19 193
2020 327 232 233 169
2021 478 422 492 198
नोट:- ये आंकड़े एक जनवरी से 30 नवंबर 2021 तक के हैं। स्रोत-यातायात पुलिस
- शहर की यातायात व्यवस्था काफी खराब है। यातायात पुलिस ट्रैफिक को ठीक से संचालित नहीं कर पाती है। उस पर अजीबोगरीब समय के हिसाब से चलने वाली लाल बत्ती भी असमंजस में डाल देती है। - बिट्टू पाठक एडवोकेट।
- मिनटों के काम के लिए घर से निकलो, तय जगह तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। उसके ऊपर चौराहों पर लाल बत्ती कहीं जलती हैं, कहीं नहीं। परसों एक चौराहे पर अचानक आगे वाले चालक ने अपना वाहन रोक दिया तो टक्कर हो गई थी। - कौशल किशोर गौतम।