| धातु |
भारतीय मानक |
डब्ल्यूएचओ मानक |
| क्रोमियम |
0.5 |
0.5 |
| लोहा |
0.3 |
0.3 |
| मैगनीज |
0.1 |
0.4 |
| जिंक |
5 |
3 |
| तांबा |
0.05 |
2 |
| निकेल |
0.02 |
2 |
(मात्रा मिलीग्राम लीटर में)
शोध: सेहत के लिए इस तरह है खतरा
निकिल
निकिल फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसके संपर्क में आने से त्वचा की एलर्जी, फेफड़ों के फाइब्रोसिस और लोगों में श्वसन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
क्रोमियम
क्रोमियम त्वचा के संपर्क में आने पर यह यकृत परिगलन, झिल्ली के अल्सर और त्वचा की सूजन जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है।
लोहा
यह सभी जीवों के लिए आवश्यक है और हीमोग्लोबिन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लेकिन इसकी भी ज्यादा मात्रा बीमारियों की वजह बन सकती है।
मैगनीज
पेयजल की उच्च मात्रा स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है, लेकिन यह मानक के अनुरूप ही है। लेकिन फैक्टरियों से निकले पानी में इसकी मात्रा काफी अधिक है। जो भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
तांबा
तांबे का उपयोग ताला निर्माण में, मुख्य रूप से ताला सिलिंडर और चाबी जैसे घटकों में किया जाता है। जन्म के समय गठन में देरी, शरीर के वजन में कमी और यकृत और गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है।
जिंक
विभिन्न शोधों में जिंक को एक आवश्यक तत्व माना जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और रक्त में एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी की वजह बन सकती है।