कुवैत में भारतीयों के रोजगार पर चल रही कैंची का असर दिखाई देने लगा है। शहर के अमीर निशा निवासी वहीद हुसैन के साथ रहने वाले उनके रिश्तेदार कलीम (मूल निवासी रायबरेली) नौकरी के सिलसिले में कुवैत गए थे, लेकिन वे वहां पर फंस गए। एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष वहीद हुसैन के मुताबिक कलीम ने ऑडियो मैसेज भेजकर उनसे मदद मांगी है। कलीम का कहना है कि उनका मालिक उनसे टॉयलेट साफ करवाता है। विरोध करने पर मारपीट करता है।
गौरतलब हो कि कुवैत नेशनल असेंबली की कानून और विधायी समिति ने अप्रवासी कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके चलते वहां काम कर रहे लाखों विदेशियों की नौकरी पर संकट आ गया है। कुवैत की कुल आबादी 43 लाख है, जिसमें 11 लाख भारतीय हैं। इस बिल के हिसाब से भविष्य में सिर्फ 15 प्रतिशत भारतीय ही कुवैत में नौकरी कर पाएंगे। एएमयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सैयद वहीद हुसैन ने बताया कि फरवरी 2020 में कुवैत में ड्राइवर की नौकरी के लिए गए कलीम पुत्र जियाउल ने भेजे ऑडियो में कहा है कि उनको जल्द कुवैत से हिंदुस्तान लाया जाए। उनका कफील यानी मालिक (कुवैत पुलिस में कार्यरत) द्वारा टॉयलेट सफाई व अन्य कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। काम न करने पर बुरी तरह मारपीट की जाती है। इसके बाद हेल्पडेस्क संस्था से संपर्क किया, जो विदेश में फंसे लोगों की मदद के लिए काम करती है।
हेल्पडेस्क के संस्थापक सचिव रूपेश पाठक ने बताया कि कुवैत स्थित भारतीय दूतावास के मुख्य सूचना अधिकारी जलाधि मुखर्जी एवं अपीलीय प्राधिकरण अधिकारी राज गोपाल सिंह से संपर्क साधा है, जिसमें कलीम को वंदे भारत मिशन के तहत हिंदुस्तान वापस भेजने की गुजारिश की है। उनके मुताबिक, भारतीय दूतावास की ओर से इस मामले का संज्ञान ले लिया गया है।