शब-ए-बरात का त्योहार आज (रविवार) मनाया जाएगा। मस्जिदों व घरों में इबादत व कुरान की तिलावत होगी, जबकि कब्रिस्तान में रिश्तेदारों की कब्रों पर चिराग रोशन करके खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी। रविवार को सूर्यास्त से सूर्योदय तक लोग मस्जिदों व घरों में इबादत करेंगे। पिछले वर्ष शब-ए-बरात में लॉकडाउन था। इसलिए मस्जिदों में पांच लोगों से ज्याद की भीड़ पर मनाही थी।
इस बार लॉकडाउन तो नहीं है, लेकिन मस्जिदों में शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद की तरफ से कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए ज्यादा भीड़ न जुटाने की अपील की गई है। करीब 50 साल से ज्यादा अरसे से उस्मानपाड़ा में शब-ए-बरात पर होने वाले जलसे को भी कोविड-19 संक्रमण के चलते स्थगित कर दिया गया है। इसकी पुष्टि शहर मुफ्ती ने की है।
गुनाहों से करें तौबा, इबादत से राजी करें खुदा को : शहर मुफ्ती
शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद ने कहा कि शब-ए-बरात पर की गई इबादत का सवाब (पुण्य) बेशुमार है। मगरिब से फज्र तक अल्लाह तआला की तरफ से खास रहमतें आती हैं। यह रात गुनाहों से बरी वाली रात है। लिहाजा, सबको अपने गुनाहों से तौबा करनी चाहिए और अपनी इबादत से अल्लाह को राजी करें।
इस्लामी कैलेंडर का आठवां महीना
इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से शाबान आठवां महीना है। इस महीने की 14 व 15 तारीख के मध्य रात शब-ए-बरात का त्योहार मनाया जाता है, जो 28 मार्च से लेकर 29 मार्च को मनाया जाएगा। शब-ए-बरात का अर्थ है शब यानी रात और बरात यानी बरी होना। शब-ए-बरात को इस दुनिया को छोड़कर जाने वाले अपने रिश्तेदारों की कब्रों में रोशनी और उनके लिए मगफिरत की दुआ की जाती है।