नलसर लॉ यूनिवर्सिटी हैदराबाद के कुलपति प्रो. फैजान मुस्तफा ने कहा कि तीन तलाक पर अंकुश लगाना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, क्योंकि इस प्रकार का कोई भी आदेश भारत के क्रिमिनल लॉ के संदर्भ में विरोधाभासी होगा।
प्रो. मुस्तफा सोमवार को एएमयू पालीटेक्निक सभागार में छात्र संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने अखिल भारतीय सर सैयद मेमोरियल डिबेट 2017 के विजेताओं को सम्मानित किया। ‘धार्मिक स्वतंत्रता एवं भाईचारा’ विषय पर उन्होंने कहा कि न्यायालय नए अपराधों को जन्म नहीं दे सकता।
किसी भी क्रिया को आपराधिक घोषित करने के लिए संसद द्वारा अधिनियम बनाना होगा। धर्म जीवन का सार है और अगर धर्म को समाप्त कर दिया जाए, तो सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का ह्रास हो जाएगा। भारत में लोग विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के साथ जीते हैं और इस विषय पर किसी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विरुद्ध होगा।
प्रो. मुस्तफा ने कहा कि एक धार्मिक व्यक्ति की मुख्य विशेषता ही यह है कि वह दूसरे वर्गों के विरुद्ध किसी भी प्रकार के वैमनस्य को विकसित नहीं होने देता। हालांकि उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि आज समाज में कुछ मूल्य विहीन लोग धर्म के नाम पर ही एक-दूसरे का खून बहा रहे हैं।
भारत को तब तक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र नहीं बनाया जा सकता, जब तक यहां के सभी वर्गों को समान अवसर और भय मुक्त जीवन व्यतीत करने की स्वतंत्रता प्राप्त न हो। भारत में धर्म निरपेक्षता को बल धार्मिक लोगों के कारण नहीं मिला, बल्कि बहुलवादी तत्वों के कारण मिला है जो विभिन्न धर्मों के बीच सहिष्णुता को बहुलवादी जीवन का मुख्य तत्व मानते हैं।
प्रो. मुस्तफा ने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि कोई भी सच्चा धर्म तथा उसके सिद्धांत मौलिक मानवीय मूल्यों तथा सत्य के विरुद्ध नहीं हो सकते। आज दुख की बात है कि अंतरराष्ट्रीय मानव विकास इंडैक्स में भारत का स्थान बहुत नीचे है।
ऐसी परिस्थिति में किसी भी प्रकार की आर्थिक संपन्नता अथवा विकास स्वत: ही अर्थहीन हो जाते हैं। अतिथि का स्वागत छात्र संघ के अध्यक्ष फैजुल हसन ने किया।