अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में बुधवार सुबह अचानक प्लांट की लिक्विड ऑक्सीजन भी खत्म हो गई। जिससे हॉस्पिटल में अफरा तफरी फैल गई। दोपहर 12 बजे जब प्लांट के लिए लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई, तब सबकी सांस में सांस आई। मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी यूनिट के लिए सिलिंडर से आपूर्ति की जाने वाली ऑक्सीजन का अभी इंतजार है।
जेएन मेडिकल कॉलेज में पिछले कई दिनों से ऑक्सीजन का संकट चल रहा है। मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर और आइसोलेशन वार्ड में 200 से अधिक मरीज ऑक्सीजन पर निर्भर हैं। बुधवार सुबह 6 बजे स्टाफ ने अधिकारियों को बताया कि बस चंद घंटों की ऑक्सीजन बची है। इसके बाद लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए बताया गया कि एक घंटे में ऑक्सीजन मिल जाएगी।
उसी के मुताबिक स्टाफ ने ऑक्सीजन के वितरण की व्यवस्था की। लेकिन 10 बजे के बाद भी ऑक्सीजन नहीं आई तो मेडिकल स्टाफ के हाथ-पैर फूल गए। हॉस्पिटल में अफरा-तफरी की स्थिति हो गई। दोपहर 12 बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकी। इसके बाद ही सभी ने राहत की सांस ली।
- सुबह कुछ घंटों की ऑक्सीजन बची थी। मेडिकल ऑक्सीजन के लिए लिक्विड की आवश्यकता होती है, जिसको गैस में बदलकर मरीजों को आपूर्ति करते हैं, लेकिन बुधवार सुबह हमारे पास कुछ ही घंटे की ऑक्सीजन बची थी। हमें उम्मीद थी कि थोड़ी देर बाद ऑक्सीजन की आपूर्ति हो जाएगी लेकिन दोपहर तक जब नहीं आई तो सभी का परेशान होना स्वाभाविक था। दोपहर 12 बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति हो गई। कार्डियोलॉजी यूनिट में अभी भी सिलिंडर वाली ऑक्सीजन का इंतजार है। - प्रोफेसर शाहिद अली सिद्दीकी, प्रिंसिपल जेएन मेडिकल कॉलेज
नए मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ वापस भेजा जा रहा
जेएन मेडिकल कॉलेज में अब स्थिति यह है कि जो पहले से भर्ती मरीज हैं, उनको ही ऑक्सीजन की आपूर्ति ठीक प्रकार से नहीं हो पा रही है। ऐसे में नए मरीज, जो ऑक्सीजन की आवश्यकता के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं, उनको वहां से वापस भेजा जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर शाहिद सिद्दीकी कहते हैं कि वापस भेजते समय हम इतना ध्यान जरूर रख रहे हैं कि उनको इतना प्राथमिक उपचार दे दिया जाए, जिससे कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक यथा स्थिति बनी रहे।