गोपाल दास नीरज की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करते परिजन।
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आगरा में बीते सोमवार 16 जुलाई को नीरज जी तबियत खराब हो गई थी। मंगलवार को उनको वहीं पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद उनकी हालात में सुधार नहीं हुआ। बुधवार को आगरा में ही अस्पताल के रहने के दौरान उन्होंने इशारों से बात करना चाहा था लेकिन कई तरह के उपकरण लगे होने के कारण वह अपनी बात नहीं कह सके। इसी बीच अस्पताल में डाक्टर के लिखे गए एक पर्चे में उन्होंने कुछ लिखने का इशारा किया। जब उनको पर्चा दिया गया तो उन्होंने पेन से कंपकपाते हाथों से एक ही शब्द लिखा... टाइम।
ज्योतिषशास्त्र के बेहद अच्छे जानकार नीरज जी को अपने आखिरी टाइम का भी अहसास हो गया था। इसलिए गुजरे छह महीने से वह जहां भी जाते खुद ही कहते कि अब शायद दोबारा मिलना नहीं हो पाएगा। वह कई बार ये भी कह चुके थे कि अगर 2018 गुजर गया तो वह आगे स्वस्थ रहेंगे। वह इशारों में कहना चाहते थे कि टाइम पूरा हो गया है। लेकिन दादा को हर कीमत पर बचाने में लगे परिजनों को किसी बात पर संतोष नहीं हुआ। वह आगरा से उन्हें एम्स ले गए। जहां गुरुवार शाम को उनका निधन हो गया।
गीतकार अवनीश ने दी श्रद्धांजलि
गोपालदास नीरज जी के निधन के बाद से अब तक लोगों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देने की श्रंखला जारी है। इस क्रम में गीतकार अवनीश राही ने नीरज जी से जुड़ी अपनी स्मृतियों को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। जिसमें उन्होंने कहा है कि उनका पहला गीत सुनकर नीरज जी ने मुंबई में जाने की सलाह दी थी। इसके साथ ही तत्काल उन्होंने संगीतकार दिलीप सैन-समीर सैन व अभिनेता देवानंद के लिये दो पत्र लिखे। अवनीश ने बताया कि हालांकि वह मुंबई नहीं जा सके, लेकिन आज भी वह दोनों पत्र उनके पास सुरक्षित हैं।
शरीर दान करना चाहते थे नीरज
मिलन प्रभात ने बताया कि गोपालदास नीरज मरणोपरांत अपना शरीर दान करना चाहते थे, लेकिन शरीर में इन्फेक्शन होने से उनके पूरे शरीर में संक्रमण फैल गया था। ऐसे में डाक्टर ने उन्हें शरीर दान करने से मना किया।
दो बार सरकार ने किया सम्मानित
गोपालदास नीरज को फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लिखने के लिए 1970, 1971 और 1972 में लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वहीं उन्हें विश्व उर्दू परिषद पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से 1994 में यश भारती एवं एक लाख रुपये पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। जबकि वर्ष 1991 में पद्मश्री और वर्ष 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।