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सासनी के जरिये देर शाम हाथरस में प्रवेश कर गया दूसरा टिड्डी दल

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खेत से टिड्डी दिखाते किसान। - फोटो : ALIGARH
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राजस्थान के धनकौर, झांझर, खुर्जा जंक्शन, मुनी और बुलंदशहर के गांव अरनियां होते हुए जिले के सीमावर्ती गांव गभाना के मढ़ौला होते हुए जिले में प्रवेश करने वाला दूसरा टिड्डी दल अब सासनी होते हुए हाथरस जनपद में प्रवेश कर गया है। होडल के जरिये घुसा दूसरा दल भी सासनी के जरिये जनपद से बाहर निकलने पर पूरी रात और रविवार को सारे दिन उसे भगाने एवं मारने की जुगत में लगे रहे कृषि, उद्यान अफसर व कर्मचारियों की टीमों ने राहत की सांस ली है। इनका पीछा करते हुए राजस्थान से आई केंद्रीय टीमें भी पीछे पीछे चली गई हैं।
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70 किमी की रफ्तार से आया पहला दल दे रहा था सूर्य ग्रहण सा आभास
राजस्थान के धनकौर, झांझर, खुर्जा जंक्शन, मुनी होते हुए बुलंदशहर के अरनियां से गभाना में प्रवेश करने वाले पहले दल ने गभाना बार्डर के गांव मढौला, बलवंत नगलिया, भूपाल नगलिया, रनियावली, पाहवटी में शनिवार सायं साढ़े पांच बजे हमला बोला। ढ़ाई किलोमीटर लंबाई एवं 250 मीटर चौड़ाई में चल रहा यह टिड्डी दल सूर्य ग्रहण का सा आभास दे रहा था। इसके बाद बरौली होते हुए तहसील कोल के कासिमपुर क्षेत्र होते हुए सायं सात बजे तक गांव कलाई पहुंच गया।

हालांकि तब तक दल की रफ्तार हवा का रुख नरम होने के चलते मात्र 15 किमी प्रति घंटा रह गई थी। यहां कृषि टीमों और ग्रामीणों की सक्त्रिस्यता के चलते पूरा झुंड बरा नदी के किनारे आम के बाग में बैठ गया। नगला बंजारा, भवीगढ़ी एवं दाऊदपुर गांव में भी टिड्डियों के दल देखे गये। कृषि टीमों द्वारा फागिंग से परेशान होकर रविवार सायं छह बजे तक सासनी के जरिये हाथरस चला गया। एक किलोमीटर के दायरे में टप्पल के जरिये जिले में प्रवेश करने वाला दूसरा दल खैर, गोंडा के जरिये इगलास पहुंचा और यहां से सासनी की ओर चला गया।
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रात भर भागते रहे अफसर
टिड्डी दल के हमले की सूचना मिलते ही जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी एनके सहानियां अपनी टीमों के साथ इनके पीछे लग गये। यह टीमें रात भर गभाना से कासिमपुर पावर हाउस, हरदुआगंज क्षेत्र के गांव कलाई, बरा नदी, भुवीगढ़ी, दाऊदपुर, नगला बंजारा में नगर निगम व कृषि फार्म के ट्रैक्टरों से फागिंग मशीन के जरिये दवाओं का छिड़काव कराती रहीं और आखिर में सासनी तक दल को भगाकर ही इन लोगों ने दम लिया।


सुबह तीन बजे पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर कृषि
टिड्डी दल का पीछा कृषि विभाग की केंद्रीय टीमें राजस्थान से ही कर रही हैं। शनिवार रात नौ बजे असिस्टेंट डायरेक्टर कृषि भारत सरकार एसएन सिंह तीन सदस्यीय दल के साथ गभाना पहुंच गये थे। डिप्टी डायरेक्टर बीके गुर्जर सुबह तीन बजे दिल्ली से सीधे हरदुआगंज आए।


अभी भी टला नहीं है खतरा
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जयपुर और पाकिस्तान की सीमा के मध्य कई सारे टिड्डी दल सक्रिय हैं। जो कभी भी हवा की रफ्तार से हमला बोल सकते हैं।


बलुई मिट्टी वाले क्षेत्र में देते हैं अंडा
डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर अनिल कुमार ने बताया कि टिड्डी राजस्थान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान आदि की बलुई मिट्टी वाले क्षेत्रों में अंडे देती है,ं जिससे छोटे-छोटे कीट निकलते हैं और बड़े होने पर लाखों करोड़ों की संख्या में उड़ान भरते हैं। टिड्डी दल में करोड़ों- अरबों की संख्या में लगभग दो ढाई इंच लंबे कीट होते हैं जो फसलों को कुछ ही घंटों में चट कर जाते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं।


किसानों को सलाह
कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि टिड्डी दल के हमले से बचने के लिये किसान खेतों में आग जलाकर, पटाखे फोड़कर, थाली व चम्मच के सिवाय ढोल-नगाड़े बजाकर आवाज करें। टिड्डी दल के पीछे पीछे डीजे या उच्च ध्वनि वाले यंत्र बजाएं, इससे भी टिड्डी दल भागता है। कीटनाशक रसायनों जैसे क्लोरपीरिफॉस 20 प्रतिशत ईसी 2.5 एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी, लैम्डा साईहेलोथ्रिन 4.9 प्रतिशत ईसी की एक एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी, डेल्टामथ्रीन 2.8 प्रतिशत ईसी की एक एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर टिड्डी दल पर छिड़काव करें।

कीटनाशक छिड़काव के बाद कम से कम एक सप्ताह तक हरा चारा पशुओं को न खिलाए। टिड्डी दल शाम को 7 से 8 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8-9 बजे के करीब उड़ान भरता है। इसी अवधि में इनके ऊपर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको, मारा जा सकता है।


किसानों से अपील
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार ने किसानों से अपील की कि यदि आपके क्षेत्र में टिड्डी दल दिखाई देता है तो उपरोक्त उपाय को अपनाते हुए तत्काल अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के कर्मचारी, लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी, उप कृषि निदेशक, उप जिलाधिकारी को सूचित करें।


टिड्डी दल रविवार सायं छह बजे के करीब सासनी के जरिये हाथरस में प्रवेश कर गया है। यह बरा नदी के पास के आम के बाग में बैठा था। यहां उसने आम की पत्तियों को निशाना बनाया। लेकिन अन्य फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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विनोद कुमार, जिला कृषि अधिकारी
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