जानकारी के अनुसार छात्रा ने फिनाइल की मात्रा कम पी थी, इसीलिए वह ठीक है। अगर उसने अधिक मात्रा में फिनाइल पी ली होती तो स्थिति विपरीत और भयावह होती। अब ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार बच्चों की पहुंच से दूर रखा जाने वाला फिनाइल उनके हाथों में कैसे पहुंचा? अगर फिनाइल की जगह छात्रा के हाथ तेजाब लग गया होता और वह उसे पी गई होती तो क्या होता?
बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने मामले को लेकर कहा कि फिनाइल पीने के प्रकरण में कौन जिम्मेदार है। क्या विद्यालयों में घातक सामग्रियों को रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अगर है तो छात्राओं के हाथ में फिनाइल की बोतल कैसे पहुंची।
उन्होंने कहा कि वॉर्डन से स्पष्टीकरण तलब किया जा रहा है कि आखिरकार छात्राओं को फिनाइल की बोतल कैसे मिली। वहीं घातक सामग्रियों को अलमारी में रखने के आदेश जारी किए जाएंगे, जिससे ऐसी वस्तुएं बच्चों की पहुंच से दूर रहे। इस प्रकार की लापरवाही किसी भी प्रकार से बर्दाशत नहीं की जाएगी।