कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में फूलों का कारोबार बुरी तरह मुरझा गया है। दरअसल, कोरोना कर्फ्यू में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों पर रोक लगी है, जबकि शादी समारोह भी उस शानो-शौकत से नहीं हो रहे हैं, जो कार्यक्रम हो भी रहे हैं तो सिर्फ रस्मअदायगी भर है। ऐसे हालात में फूलों की मांग बेहद कम है। इसके चलते फूलों का कारोबार करने वाले लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां दिल्ली व मथुरा की मंडियों से फूल आते हैं। वर्तमान में बेला 300 रुपए प्रति किलो, गुलाब 150, गेंदा 50 और रजनीगंधा 300 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। स्थानीय बाजार में मांग न के बराबर है। ऐसे में माल मंगा भी लें तो कोई खरीदार नहीं है। ऐसे में नुकसान होना तय है। बताया कि जब तक सभी गतिविधियां सामान्य नहीं होंगी, तब तक उनका काम-धंधा पटरी पर नहीं आएगा। अलीगढ़ में फूलों का मुख्य कारोबार फूल चौराहा, मानिक चौक, दुबे का पड़ाव मार्केट पर होता है। इसके अलावा, अचल ताल, बारहद्वारी, रघुवीर पुरी के मंदिरों के बाहर भी फुटकर विक्रेता फूल बेचते हैं लेकिन वर्तमान में इन सभी स्थानों पर फूलों का काम लगभग बंद है।
- अलीगढ़ में मथुरा और दिल्ली से माल आता है। इस समय हालात यह हैं कि वहां भी फूल नहीं आ रहे हैं। इसलिए फूलों की आपूर्ति नहीं हो रही है। - पंकज सैनी, फूल कारोबारी
- अगर हम किसी तरह माल मंगा भी लें तो बाजार में मांग ही नहीं है। इसलिए परिस्थितियां अनुकूल होने का इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं है। - राहुल सैनी, फूल कारोबारी
- इस समय मंडी बंद है। बेला 300 रुपए किलो, गुलाब 150, गेंदा 50 और रजनीगंधा 300 रुपए किलो तक मिल रहा है। इसमें नुकसान होना तय है। - अभिषेक सैनी, फूल कारोबारी
- हमारा व्यापार कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजन, शादी समारोह पर निर्भर रहता है। यही बंद है तो हम माल कहां ले जाएं। हालात सामान्य होने का इंतजार है। - काका सैनी, फूल कारोबारी