एएमयू में 23 अप्रैल की रात कुलपति जमीरउद्दीन शाह भी निशाने पर थे। वीसी लॉज में घुसकर उनकी हत्या करना बलवाइयों का उद्देश्य था। यह राज खुद झगड़े की शुरुआत के मुख्य आरोपी गाजीपुर गुट के नेतृत्वकर्ता रहे एएमयू छात्र जोरेज ने उजागर किया है।
मगर खास बात है कि यह राज उगलते हुए उसने गाजीपुर गुट और प्रॉक्टर व पीवीसी के खिलाफ आवाज बुलंद की है। अपने भाई के माध्यम से उसने जेल से इस तरह की चिट्ठी जारी कर सनसनी फैला दी है। हालांकि चिट्ठी जोरेज द्वारा भेजी गई है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
जेल की बैरक नंबर 23 में निरुद्ध एएमयू में पीएचडी विधि संकाय के छात्र जोरेज ने अपने भाई के माध्यम से भेजी चिट्ठी में कहा है कि वह हेल्थ सेंटर में हुए मसले को लेकर रिपोर्ट कराने प्रॉक्टर कार्यालय गया था।
मगर वहां षड्यंत्र रचकर प्रॉक्टर, पीवीसी व उनके सहयोगियों ने एक गुट के साथ मिलकर फायरिंग करवा दी। जिसमें दो पूर्व छात्रों की जान चली गई। इसकी रिपोर्ट कराने को प्रॉक्टर कार्यालय में तहरीर दी, मगर हमारी तहरीर नहीं लिखी गई। इसके बाद इन्हीं के इशारे पर आगजनी कराई गई।
वीसी लॉज को भी निशाना बनाया गया। मकसद कुलपति की हत्या कराना था। ताकि बवाल बढ़े और जल्द से जल्द अहमद अली नए वीसी बन सकें। इस घटना की तहरीर प्रॉक्टर कार्यालय को दी और बयान थाना पुलिस से लेकर एसपी सिटी तक को दिया। मगर किसी ने सुनवाई नहीं की। अब सीसीटीवी फुटेज से भी पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने में लगी है। पीवीसी गाजीपुर गुट को पनाह दे रहे हैं। इसमें प्रॉक्टर भी शामिल हैं। जोरेज के अनुसार उसके संबंध कुछ बीजेपी नेताओं से हैं। इसलिए पीवीसी को यह सब पसंद नहीं था। बस इसी बात से चिढ़कर इस साजिश में उसे फंसाया गया है।
जोरेज की कहानी पर जांच में उठे सवाल
जोरेज की कहानी पर गौर करें तो पहला झगड़ा एएमयू हेल्थ सेंटर पर हुआ। इस झगड़े में मोहसिन की तरफ से सबसे पहले तहरीर प्रॉक्टर को दी गई, जिसमें जोरेज व उसके ग्रुप पर आरोप था। वह तहरीर लेकर प्रॉक्टर कार्यालय बैठा था। तभी सीसीटीवी के अनुसार जोरेज की अगुवाई में बाइकों पर ग्रुप आया और फायरिंग कर चला गया। यह ग्रुप सीधा मोहसिन के कमरे में पहुंचा, जहां आगजनी व तोड़फोड़ की। फिर प्रॉक्टर कार्यालय में ही बैठे मोहसिन के फोन पर जोरेज ने उसे धमकी दी। वहां से कुछ देर बाद फिर जोरेज ग्रुप काफी संख्या में आया और आते ही प्रॉक्टर कार्यालय पर फिर फायरिंग की, जिसमें दो पूर्व छात्रों की जान गई। यह बात अलग है कि मरने वालों में एक गाजीपुर का था। उसके पीठ में गोली पीछे से लगी। सीसीटीवी के साक्ष्य बता रहे हैं कि जोरेज ग्रुप के साथ आए इस पूर्व छात्र ने विपक्षी से बातचीत शुरू की, तभी पीछे से चली गोली उसकी पीठ में लगी। सीसीटीवी के अनुसार फायरिंग पहले जोरेज की अगुवाई में आए ग्रुप ने शुरू की। अब तक की जांच, साक्ष्य आदि बता रहे हैं कि जोरेज घटना के लिए जोरेज की अगुवाई वाला गुट जिम्मेदार है।
-जेल से चिट्ठी इस तरह से भेजना जायज या मान्य नहीं है। कोई भी बंदी अपनी बात बाहर किसी भी मंच या पटल पर रखने के लिए जेल प्रशासन के माध्यम से ही चिट्ठी भेजता है। उसे मान्य माना जाता है। अब इस तरह कौन किसके लिए चिट्ठी भेज रहा है, उसमें कितनी सच्चाई है, यह कैसे कहा जा सकता है।-डॉ.वीरेश राज, वरिष्ठ अधीक्षक जेल
-एएमयू में हुए झगड़े की सबसे पहली सूचना जोरेज के खिलाफ प्रॉक्टर कार्यालय को मिली थी। इसके बाद हर घटना में सीसीटीवी व साक्ष्य के आधार पर जोरेज की अगुवाई वाला ग्रुप ही दोषी पाया जा रहा है। रहा सवाल पुलिस को किसी तहरीर या बयान का तो एएमयू नियम के अनुसार कोई घटना बिना प्रॉक्टर कार्यालय की संस्तुति के पुलिस तक नहीं आती और आने पर वह मान्य नहीं होती। बाकी हर अपराधी पुलिस गिरफ्त में आने के बाद तमाम आरोप लगाता है। जिन्हें ध्यान में जाता है।-राजीव सिंह, सीओ तृतीय