गेमिंग डिसऑर्डर के शिकार हो रहे हैं बच्चे
स्वास्थ्य विभाग की साइको थेरेपिस्ट (पीएसडब्ल्यू) डॉ. अंशु सोम का कहना है कि इस प्रकार की लत को गेमिंग डिसऑर्डर कहते हैं, यह इंटरनेट एडिक्शन का ही एक हिस्सा है। इस डिसऑर्डर के शिकार बच्चों में चिड़चिड़ापन, बात-बात पर उग्र होना, नींद न आना, गेम हारने या न खेल पाने की स्थिति में बेहद उदास रहना आदि समस्याएं आती हैं। बच्चों का दिमाग गेम में इतना रहता है कि वह किसी से बातचीत भी नहीं करते हैं।
बच्चों में इस प्रकार के लक्षण दिखने पर अभिभावकों को सतर्क हो जाना चाहिए। इस डिसऑर्डर से बाहर निकालने के लिए बच्चों से बातचीत करें। मोबाइल से दूर रखने की कोशिश करें, आउटडोर गेम खिलाएं। किसी मनोवैज्ञानिक से बच्चों की काउंसिलिंग कराएं। समय रहते बच्चों पर ध्यान नहीं दिया तो अभिभावकों को अधिक नुकसान हो सकता है।