टप्पल क्षेत्र के गांव मिलिक फतेहपुर में यमुना नदी में डूबे संजय उर्फ श्रीपाल (35) का शव 22 घंटे बाद मंगलवार की सुबह पानी से निकाला जा सका। एनडीआरएफ की टीम भी शव की तलाश में लगी थी। वह सोमवार की दोपहर एक बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान यमुना नदी में नहाते समय डूबे थे।
गांव मिलिक फतेहपुर निवासी छिद्दी सिंह (85) का रविवार को निधन हो गया था। सोमवार दोपहर परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार करने के लिए शव यमुना नदी के किनारे ले गए थे। अंतिम संस्कार के बाद नहाते समय संजय उर्फ श्रीपाल पुत्र श्रीराम तेज बहाव और अधिक गहराई के कारण नदी के पानी में डूब गए।
सूचना पर टप्पल थाना पुलिस के साथ ही गोताखोर, अग्निशमन कर्मी पहुंच गए। एनडीआरएफ की टीम भी बुला ली गई। लगातार तलाश के बाद मंगलवार सुबह करीब दस बजे नदी के पानी से शव बाहर निकाला जा सका। थाना प्रभारी अरुण कुमार ने बताया कि परिजन के पोस्टमार्टम से इन्कार करने पर पंचनामा भरकर शव परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। वह पांच भाइयों में सबसे छोटे थे।
नदी किनारे नहीं है श्मशान घाट
संजय उर्फ श्रीपाल की मौत से गांव में श्मशान घाट की समस्या को लेकर फिर से ग्रामीणों की नाराजगी उभर आई। ग्रामीणों के अनुसार पहले भी इसी तरह के हादसे हो चुके हैं। प्रशासन से नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने सहित गांव में श्मशान घाट बनवाने की मांग की गई। गांव में श्मशान घाट बन जाए तो यमुना नदी के किनारे जाना ही न पड़े। वहां पर हमेशा खतरे का अंदेशा बना रहता है।