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The Aligarh Bar Association: तो अवमानना कौन झेलेगा, चुनाव न कराने पर अडिग खेमे की अपनी दलील

Sun, 15 Feb 2026 02:33 PM IST
चमन शर्मा अभिषेक शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को अवकाश के बीच चुनाव कराने पर अडिग खेमे द्वारा गठित कमेटी ने बार कार्यालय के ताले मिस्त्री से खुलवाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी।
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दीवानी कचहरी में चुनाव को लेकर बैठक करते अधिवक्ता - फोटो : संवाद
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विस्तार
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दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के चुनाव होंगे या नहीं? ये तो भविष्य के गर्त में छिपा है। पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों खेमों के इस चुनाव को लेकर अपने-अपने तर्क हैं। चुनाव न कराने की पक्षधर वर्तमान कमेटी का तर्क है कि अगर चुनाव कराने पर सुप्रीम कोर्ट से अवमानना संबंधी कार्रवाई होती है तो उसे कौन झेलेगा। वहीं, दूसरे खेमा तर्क दे रहा है कि प्रयागराज में चुनाव हुए। हमारी चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बीच आदेश मिला है तो क्यों नहीं कराया जा सकता।

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यह है मौजूदा कमेटी का तर्क
इस विषय में बार अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंह व सचिव दीपक बंसल का कहना है कि हमें चुनाव कराने में कोई ऐतराज नहीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुपालन के संबंध में आख्या हाईकोर्ट रजिस्ट्रार से लेकर यूपी बार काउंसिल तक ने मांगी है। इस पर निर्वाचन अधिकारी ने भी चुनाव कराने में असहमति जता दी। ऐसे में अगर चुनाव कराया गया तो अवमानना की कार्रवाई तो उन्हीं पर होगी। दूसरा उनका तर्क ये भी है कि शुक्रवार को ही अंतिम मतदाता सूची जारी होनी थी, लेकिन उससे पहले यह हंगामा खड़ा हो गया। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। तीसरा उनका कहना है कि वर्तमान कमेटी के अलावा एल्डर कमेटी को चुनाव कराने का हक है, लेकिन वर्तमान में एल्डर कमेटी तीन वर्ष से बार में है नहीं। इसलिए चिट फंड सोसाइटी के नियम व बार के नियम के अनुसार अन्य कोई कमेटी चुनाव नहीं करा सकती। 
यह भी पढ़ें... The Aligarh Bar Association: हंगामे के बीच चुनाव स्थगित, दूसरा खेमा चुनाव कराने पर अडिग
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चुनाव पक्षधर खेमे का तर्क
इस संबंध में शुक्रवार को हंगामे के बाद सर्वसम्मति से गठित की गई चुनाव कराने वाली कमेटी के प्रमुख सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता रामबाबू शर्मा का कहना है कि जो चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई। बीच में नहीं रोका जा सकता। दूसरा वर्तमान कमेटी के पदाधिकारी इस निर्देश की आड़ में अपना कार्यकाल दो वर्ष करना चाहते हैं। यह नियम विरुद्ध है। कमेटी पदाधिकारियों द्वारा अभी से बार के बोर्ड पर खुद को नए वर्ष का पदाधिकारी अंकित करा दिया गया है। ये भी गलत है।

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कमेटी ने खुलवाया कार्यालय.. चुनाव प्रक्रिया शुरू
दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को अवकाश के बीच चुनाव कराने पर अडिग खेमे द्वारा गठित कमेटी ने बार कार्यालय के ताले मिस्त्री से खुलवाकर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी। इस दौरान मतदाता सूची व मतपत्र प्रकाशन पर काम शुरू किया गया। वहीं, सभी प्रत्याशियों ने भी इस सात सदस्यीय समिति के पक्ष में शपथ पत्र दिए हैं, जिसमें उनके निर्देशन में चुनाव कराने में विश्वास जताया है। 

दि अलीगढ़ बार एसोसिएशन का सालाना चुनाव न कराए जाने के फैसले के खिलाफ शुक्रवार को बार कार्यालय के बाहर कई सौ अधिवक्ताओं ने बैठक की। इसमें कई वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल रहे। उनके द्वारा सर्वसम्मति से सात सदस्यीय समिति बनाई गई, जिसकी निगरानी में अब चुनाव कराना तय किया गया। इस समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता रामबाबू शर्मा, प्रमोद कुमार चौहान, राजकुमार यदुवंशी, चौधरी मलखान सिंह, ठाकुर रामप्रताप सिंह, ठाकुर अमर सिंह यदुवंशी, संतोष कुमार वशिष्ठ को शामिल किया गया है। 

यही समिति रामबाबू शर्मा की अगुवाई में शनिवार को बार कार्यालय पहुंची। सभी की सहमति से मिस्त्री बुलवाकर बार कार्यालय के ताले खुलवाए गए। इसके बाद कार्यालय में 18 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें सबसे पहले अब तक तैयार की गई मतदाता सूची को अंतिम सूची मानकर उससे चुनाव कराना तय किया गया। साथ में मतपत्र प्रकाशन की प्रक्रिया भी शुरू कराई गई। समिति के वरिष्ठ सदस्य रामबाबू शर्मा का कहना है कि सर्व सम्मति से बनी समिति ने चुनाव संचालन प्रक्रिया शुरू कर दी है। हमें प्रत्याशियों ने भी समर्थन दिया है।
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