कस्बा चंडौस में कोतवाली के सामने और गांधी इंटर कॉलेज के पीछे आर्मी के पड़ाव की जमीन पर खड़ी गर्गज मीनार मुगल काल और उसके बाद अंग्रेजी हुकूमत में सुरक्षा के लिहाज से अहम भूमिका निभाती थी, लेकिन रखरखाव के अभाव में आज यह मीनार अपनी ही सुरक्षा के लिए तरस रही है। मुगल काल में इस मीनार का उपयोग दुश्मनों पर नजर रखने के अलावा अन्य संकट की घड़ी में किया जाता था। जैसे-जैसे वक्त बदला है वैसे-वैसे यह मीनार खंडहर में तब्दील होती जा रही है।
कस्बा निवासी दानवीर वर्मा का कहना है कि मीनार का निर्माण सन 1525 में मुगलकाल के दौरान हुआ बताया जाता है। सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी के लिए सैनिक इस पर चढ़कर रात के अंधेरे में आग की लौ दिखाते थे और नगाड़ा भी बजाकर संकेत देते थे। मीनार के नीचे सुरंग भी बताई जाती है। मीनार की ऊंचाई करीब 80 फीट है तथा नींव बहुत गहरी है। मथुरा कैंट से सेना के अधिकारी इसकी देखरेख के लिए चंडौस आते-जाते रहते हैं, क्योंकि आज भी इसके आसपास की सात बीघा जमीन फौजी पड़ाव व मीनार मथुरा आर्मी कैंट के अधीन है। सांसद व विधायक को चाहिए कि मीनार स्थल का सौंदर्यीकरण करवाएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुरातत्व विभाग और प्रशासन इस पर ध्यान दें तो इस मीनार को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर चंडौस को एक नई पहचान भी मिल सकती है। इस तरह की मीनारें गौतमबुद्धनगर व मथुरा जिले में भी देखी गई हैं। कोतवाली के सामने होने के बाद भी जमीन और मीनार की जड़ों से अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
- मीनार कभी सुरक्षा और पहरेदारी के लिए इस्तेमाल होती थी। ऐसा हमारे बुजुर्ग लोग बताते थे। इसको संरक्षित करने की जरूरत है। - गणेश दत्त शर्मा चंडौस
- मीनार हमारे क्षेत्र की धरोहर है, इसलिए इसका सौंदर्यीकरण नगर पंचायत स्तर पर भी कराया जाना चाहिए। इसका प्रस्ताव बोर्ड की अगली बैठक में मैं स्वयं रखूंगा। -विनोद गुप्ता, वार्ड सदस्य, नगर पंचायत चंडौस