शहर में वाणिज्य कर चोरों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा हो गया है। जिसमें ट्रांसपोर्टर, फर्जी फर्म बना कर बिल बेचने वाले, विभागीय सेटिंग कराने वाले दलाल और कुछ पुलिस कर्मी शामिल हैं। यह नेटवर्क इतना बड़ा है कि कुछ महीने में ही इसने पांच करोड़ का माल अलीगढ़ से बाहर भेज दिया। जानकारों की मानें तो अलीगढ़ से दक्षिण भारत तक भेजे जाने वाले ताला, हार्डवेयर, मूर्ति, इलेक्ट्रिकल्स गुड्स, मशीनें, प्लास्टिक के सामान आदि भेजने में सबसे ज्यादा कर की चोरी हुई। विशेषज्ञों की मानें तो कर चोरी की ये रकम पांच करोड़ से भी अधिक हो सकती है।
जब लगातार टैक्स वसूली में गिरावट आई तो विभाग में खलबली मची। जांच पड़ताल में 58 ट्रांसपोर्टरों को फर्जी बिलों के माध्यम से माल भेजते पकड़ा गया। अधिकारियों ने इन मामलों में लगभग 65 लाख रुपये की कर चोरी और जुर्माना वसूला है। जिसमें शहर के नामी ट्रांसपोर्टर भी शामिल हैं। ट्रांसपोर्टरों से मिले बिलों पर फर्जी फर्मों का सत्यापन हुआ तो 30 फर्में ऐसी मिलीं जिन्होंने अपने बिलों से माल तो भेजा, लेकिन एक रुपये का टैक्स अदा नहीं किया। इन फर्माें को बंद कराने के साथ ही अब इनके खिलाफ पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी है। फर्जी फर्म के मामले में नवेद गैंग जबकि ट्रांसपोर्टरों में सबसे ज्यादा लगभग 20 लाख रुपये की बड़ी वसूली ‘जर्मन ग्रुप’ से हुई है।
अब कर चोरी रोकने के लिए और व्यापारियों को पंजीकरण के दायरे में लाने के लिए चारों ओर से शिकंजा कसा जा रहा है। शहर में 20 हजार से ज्यादा कारोबारी निशाने पर हैं। जिनका सालाना कारोबार पांच लाख रुपये से ज्यादा का है।
पांच लाख रुपये से ज्यादा का कारोबार होने पर टिन नंबर लेना आवश्यक है, ऐसा नहीं होने पर अर्थदंड और जुर्माना दोनों वसूला जा सकता है। विभाग ने इसके लिए कामर्शियल बिजली कनेक्शन बिल, नगर निगम की हाउस टैक्स और कॉमर्शियल टैक्स रसीदें, फूड सेफ्टी विभाग से जारी लाइसेंस, ड्रग लाइसेंस, सरकारी विभागों की सप्लाई और खरीद करने वालों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। घर-घर बनने वाले ताले, हार्डवेयर, मूर्ति, फिनिशिंग और पैकिंग करने वाले भी इसकी जद में हैं। फिलहाल अलीगढ़ में 16702 व्यापारियों के पास ही टिन नंबर है।
एक ही पैन नंबर पर 180 फर्में चल रहीं
अलीगढ़। एक ही पैन नंबर एएलटीपीआर 7342 पी पर पूरे प्रदेश में 180 फर्में चल रही हैं। अलीगढ़ में इस पैन नंबर पर कारोबार करने वाली दो फर्में पकड़ी गईं हैं। दोनों फर्मों को बंद कराने के आदेश दिए गए हैं। इसको लेकर अलीगढ़ और हाथरस में जांच जारी है। इस पैन नंबर पर सर्वाधिक फर्में रामपुर और देवरिया जिले में मिली हैं। वाणिज्य कर मुख्यालय लखनऊ के एडिशनल कमिश्नर बी रामाशास्त्री के निर्देश पर इस मामले में सघन जांच पड़ताल जारी है। आयकर विभाग के बंगलुरू कार्यालय से पूरे देश में जारी होने वाले पैन नंबर को लेकर यह गड़बड़झाला सामने आया है जिसकी जांच आयकर विभाग कर रहा है।
टिन नंबर पर चल रही फर्माें की जांच शुरू
वाणिज्य कर विभाग अपनी वेबसाइट कॉमटैक्स यूपी डॉटइनडॅाटएनआईसी डॉटइन से आन लाइन जारी होने वाले टिन नंबरों की भी जांच कर रहा है। उसे एक ही टिन नंबर से कई फर्मोँ के कारोबार करने का संदेह है। पेन नंबर में हुए घपले के बाद वाणिज्य कर विभाग ने एहतियातन अंदरखाने अपने यहां टिन नंबर पर संचालित फर्मों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
पांच लाख से ज्यादा का कारोबार करने वाले व्यापारियों को खुद ही रजिस्ट्रेशन कर लेना चाहिए अन्यथा कर चोरी में पकड़े जाने पर जुर्माना वसूल कर पंजीकरण किया जाएगा।
-इंद्र कुमार मिश्रा, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन
ट्रांसपोर्टर और फर्जी फर्म चलाने वालों का नेटवर्क लगातार निशाने पर है। अप्रैल में 41.51 करोड़ के सापेक्ष 41.64 करोड़ रुपये वसूले गए हैं। कर चोरी पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज होगी।
-अजीत कुमार शुक्ला, एडिशनल कमिश्नर एसआईबी