- मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना, जागरूकता अभियान चलाना
- प्रियजनों के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें, बात करें, भावनात्मक सहारा दें
- परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराना और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक करना
केस-1
उपचार और काउंसिलिंग से हुई सामान्य
क्वार्सी निवासी एक बालिका जब 15 साल की थी, तब अपनी आंखों के सामने ही दुर्घटना में चाचा की मौत को देखा था। इसके बाद से ही वह असहज थी। 19 साल की उम्र में वह उस घटना को लेकर खुद को जिम्मेदार मानते हुए आत्महत्या का प्रयास करने लगी। करीब एक साल से अधिक उपचार और काउंसलिंग से युवती सामान्य हो सकी है।
केस-2
आईआईटियन पति से झगड़े के बाद हुई सामान्य
शादी के 15 साल हो गए हैं। महिला के आईआईटियन पति के साथ झगड़े के चलते पारिवारिक तालमेल बिगड़ गया। संबंध ज्यादा खराब हुए तो पत्नी अवसाद में चली गई। उसने आत्महत्या का प्रयास किया। अब उपचार और काउंसलिंग के बाद उनकी हालत में सुधार है।