कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी।
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तालीम के शहर में सूफी परंपरा की खुशबू एक बार फिर महसूस हुई, जब सर सैयद नगर स्थित खानकाह-ए-नियाजिया में “देश की प्रगति में सूफी परंपरा की भूमिका” विषय पर अमर उजाला संवाद का हुआ। वक्ताओं ने सूफी विचारधारा को देश की एकता, सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विकास का आधार बताया।
खानकाह-ए-नियाजिया के डॉ. मोहम्मद अब्बास नियाजी ने कहा कि सूफी परंपरा ने हमेशा नफरत के अंधेरों में मोहब्बत की रोशनी फैलाने का काम किया है। सूफियों ने भाषा, साहित्य और समाज में आपसी प्रेम को मजबूत किया, जिससे देश की सांस्कृतिक विरासत और भी समृद्ध हुई। खानकाहें इंसानियत और भाईचारे की मिसाल हैं, जहां हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठते हैं। यहां लंगर की परंपरा और रूहानी इलाज के जरिये लोगों को जोड़ने का काम किया जाता है।
डॉ. सैयद लियाकत हुसैन मुईनी ने कहा कि सूफी परंपरा की पहली शर्त ही दूसरों का सम्मान करना है। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती जैसे महान सूफी संतों ने भारत में इस परंपरा की मजबूत नींव रखी और इंसानियत, सेवा व प्रेम का संदेश दिया। बाहर से आए सूफी संतों ने भारत की मिट्टी को अपना वतन मानकर यहां की संस्कृति में खुद को ढाल लिया, जिससे देश की गंगा-जमुनी तहजीब को नई पहचान मिली। आज के दौर में जब समाज में विभाजन की चुनौतियां सामने हैं, तब सूफी परंपरा का संदेश मोहब्बत, सहिष्णुता और भाईचारा और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है।