खुदरा दवा लाइसेंसी दुकानों पर पंजीकृत फार्मेसिस्ट संबंधी नियम के विरोध में मंगलवार को शहर की दवा दुकानें बंद रहीं। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस संबंध में जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया गया। जिसमें इस नए नियम के कारण आने वाली समस्याओं के संबंध में बताया गया।
एसीएम प्रथम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि दवाओं के फुटकर व्यापार के लिए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली 1945 के अंतर्गत व्यापारी को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से लाइसेंस लिया जाना अनिवार्य है।
नए नियम में कहा गया है कि व्यापारी फार्मेसी काउंसिल उत्तर प्रदेश द्वारा पंजीकृत फार्मेसिस्ट को ही नियुक्त करें। फुटकर विक्रेता को केवल चिकित्सक के पर्चे पर लिखी हुई दवा का नाम, स्ट्रैंथ, बैच नंबर आदि का मिलान करते हुए मरीज को दवा देनी होती है। यह काम पढ़ा-लिखा दवा विक्रेता बिना किसी पंजीकृत फार्मेसिस्ट की मदद से कर सकता है। फार्म 20 और 21 के लाइसेंस और पंजीकृत फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता के कारण केमिस्ट को उन्हें नियुक्त करना पड़ता है।
इतने पैसे देने के बाद भी अधिकतर फार्र्मेसिस्ट मेडिकल स्टोर पर बैठना नहीं चाहते हैं। इस कानून का पालन किया जाना बेहद कठिन है। इसलिए ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट देश के विभिन्न राज्यों के लगभग तीन लाख फुटकर दवा विकेताओं की परेशानी को ध्यान में रखते हुए सरकार से कदम उठाने की मांग कर रही है।
ज्ञापन देने के अवसर पर जिला अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह टिल्लू, कोषाध्यक्ष शिव शंकर शर्मा, महामंत्री आलोक कुमार गुप्ता, शरद गुप्ता, श्याम सुंदर शर्मा, दिनेश गुप्ता, राजीव जैन, शफक्कत अली खान, अशोक कुमार जैन, आशीष राठी, केके राजपूत, प्रशांत वार्ष्णेय, जाकिर अहमद आदि थे।